रेलवे कोचिंग डिपो में ओएचई लाइन के चपेट में आने से श्रमिक झुलसा
बिलासपुर। रेलवे कोचिग डिपो बिलासपुर में शुक्रवार को सफाई के दौरान एक ठेका कर्मचारी ओएचई लाइन के चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गया। आनन-फानन में घायल को पहले रेलवे अस्पताल और फिर सिम्स के बर्न यूनिट में भर्ती कराया गया। इससे पूर्व जयराम नगर कोल साइडिंग में 5 माह पूर्व एक श्रमिक कोल लोडिंग के बाद लेबल करने के दौरान ओएचई लाइन के चपेट में आकर झुलस गया था। लगातार ऐसी घटना ने रेलवे के कार्य स्थल में सुरक्षा की पोल खोल दी है। दोनों ही घटना में घायल होने वाले ठेका श्रमिक हैं।
बिलासपुर के कोचिग डिपो मे हादसा उस समय हुआ जब ठेका कर्मचारी प्रताप बर्मन और उसके साथी पानी की सप्लाई टेस्टिंग का काम कर रहे थे। इसी दौरान अधिकारियों के निर्देश पर कर्मचारी को ऊपरी हिस्से में चढ़कर काम करने कहा गया। लेकिन काम पूरा होने के बाद जब पाइप निकालने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी अचानक करंट की चपेट में आकर प्रताप बर्मन बुरी तरह झुलस गया। घटना के बारे मे कर्मचारियों ने बताया कि रेलवे के मीना नामक एक अधिकारी के निर्देश पर बिना सुरक्षा इंतज़ाम के काम कराया जा रहा था।
सहकर्मियों ने बताया कि उन्हें ऊपर चढ़कर काम करने कहा गया। तब मालूम नहीं था कि बिजली सप्लाई लाइन ऑन है। वैसे काम के दौरान हमेशा ऑफ रहती है, लेकिन वंदे भारत ट्रेन के कारण उस दिन लाइन ऑन कर दी गई थी। इसकी कोई सूचना कर्मचारियों को नहीं दी गईं। जिसके कारण यह हादसा हो गया। पूरी लापरवाही रेलवे और ठेकेदार दोनों की है। हादसे के बाद प्रताप को तत्काल रेलवे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे सिम्स के बर्न यूनिट रेफर कर दिया।
पहली घटना नहीं, इससे पूर्व जयराम नगर में भी हुआ था हादसा
मौजूद कर्मचारियों ने ठेकेदार और रेलवे अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि काम के दौरान सुरक्षा के कोई इंतज़ाम नहीं किये जाते, न ही जोखिम की श्रमिकों को जानकारी दी जाती है। बिलासपुर रेलवे कोचिग डिपो में हुआ यह हादसा पहला मामला नहीं है। पांच माह पूर्व जयराम नगर कोल साइडिंग में कोयला लोड मालगाड़ी के ऊपर श्रमिक आर्यन को लेबलिंग करने के लिए चढ़ाया गया था। वह काम पूरा कर पाता इससे पहले ओएचई लाइन में करंट सप्लाई प्रारंभ कर दिया गया। इससे श्रमिक आर्यन गंभीर रूप से झुलस गया। साथ में काम करने वाले अन्य श्रमिकों ने उसे आनफानन में मस्तुरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया। इसके बाद उसे बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पांच माह के अंतराल में यह दूसरी घटना हुई है, दोनों ही हादसा में घायल होने वाले ठेका श्रमिक है। ठेका कर्मचारियों को सुरक्षा के बिना काम कराया जाना सीधा-सीधा लापरवाही का उदाहरण है।