हाई कोर्ट ने गैंग रेप के आरोपियों की सजा यथावत रखा

00 पाक्सो अधिनियम के अपराध में आरोपी के प्रति कोई नरमी नहीं-हाईकोर्ट

०० आरोपियों को सत्र न्यायालय से 20 वर्ष कैद की सजा सुनाई गई

बिलासपुर। हाईकोर्ट ने नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म करने के आरोपियों की अपील खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न के किसी भी कृत्य को बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए और बच्चों पर यौन उत्पीड़न, यौन उत्पीड़न के ऐसे सभी अपराधों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए और पाक्सो अधिनियम के तहत अपराध करने वाले व्यक्ति के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जानी चाहिए।

सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) कोंडागांव ने अपीलकर्ताअ पंकू कश्यप, मनोह बघ्ोल एवं पिंकू कश्यप को पोक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराया और 2० साल कैद, और 5०००/- रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई, जुर्माना अदा न करने पर 3 साल (प्रत्येक) के लिए अतिरिक्त सजा भुगतना होगा। 26 अपै्रल 2019 को नाबालिग पीड़िता एक विवाह समारोह में गई थी। रात 11 बजे वह अपनी सहेली के साथ वासरूम जा रही थी। उसी समय चार युवक उसे जबरदस्ती खिंचते हुए ख्ोत में ले गए व बारी बारी से दुष्कर्म किया। पीड़िता ने रात को ही मोबाइल टार्च की रौशनी में आरोपियों का चेहरा देख ली थी। उसने घटना की जानकारी अपनी मां को दी। इसके बाद कोंडागांव थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने अपराध दर्ज कर एक नाबालिग सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने अगस्त 2021 को आरोपियों को 20 वर्ष कैद एवं 5000 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील पेश की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस बीडी गुरू की डीबी में तीनों की अपील पर एक साथ सुनवाई कर आदेश पारित किया गया। हाईकोर्ट ने आरोपियों के अधिवक्ता, शासन एवं साक्ष्य के अवलोन के बाद अपने आदेश में कहा साक्ष्य के विश्लेषण के आधार पर अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सक्षम रहा है कि घटना की तिथि पर अभियोक्ता की आयु 18 वर्ष से कम थी और वह ’’बालक’’ की श्रेणी में आती थी तथा आरोपी और विधि का उल्लंघन करने वाले बालक ने घटना की तिथि, समय और स्थान पर नाबालिग पीड़िता, जो 16 वर्ष से कम आयु की थी, के साथ बारी-बारी से, उसकी इच्छा और सहमति के बिना सामूहिक बलात्कार करके गंभीर यौन उत्पीड़न किया। धारा 376 डी सामूहिक बलात्कार: जहां किसी महिला के साथ एक या अधिक व्यक्तियों द्बारा समूह बनाकर या समान इरादे से बलात्कार किया जाता है, तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति को बलात्कार का अपराध करने वाला माना जाएगा। उपर्युक्त के अनुसार, धारा 376डी में परिभाषित सामूहिक बलात्कार और मामले के तथ्य और परिस्थितियाँ इस तथ्य को पूरी तरह से संतुष्ट करती हैं कि प्रत्येक आरोपी ने इस अपराध को करने में प्रत्यक्ष रूप से योगदान दिया है। यह एक स्थापित सिद्धांत है कि यौन अपराधों में अभियोक्ता की एकमात्र गवाही के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने में कोई कानूनी बाधा नहीं है। यौन अपराध की शिकार महिला के लिए घटना की मूल प्रकृति को भूलना कठिन होता है, तथा वर्तमान मामले में पीड़िता ने अपने साथ घटी घटना को अपने अकाट्य साक्ष्यों के माध्यम से संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया है। इसके साथ हाईकोर्ट ने आरोपियों के प्रति किसी भी नरमी को अनुचित मानते अपील खारिज करते हुए सत्र न्यायालय के आदेश को यथावत रखा है।

kamlesh Sharma

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