वीडियो न मिलना या डीएनए मैच न होना दोषियों को बचाने पर्याप्त कारण नहीं-हाई कोर्ट
00 कोर्ट ने सभी आरोपियों की सामूहिक दुष्कर्म के अपराध में सजा को यथावत रखा
बिलासपुर। सूरजपुर में नाबालिग को ब्लैकमेल कर बार बार दुष्कर्म करने के मामले में 5 आरोपियों को विशेष न्यायालय से सुनाई गई सजा को संशोधित किया किंतु आरोपियों की 376 डी की सजा 20 वर्ष कैद को यथावत रखा है। प्रकरण में एक आरोपी फरार है।
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सूरजपुर जिले के बहुचर्चित गैंगरेप केस में पांच आरोपियों को आंशिक राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें पाक्सो, एससी/एसटी और आईटी एक्ट के तहत बरी किया, क्योंकि इन मामलों में पर्याप्त सबूत नहीं थे. लेकिन आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत आरोप सिद्ध होने के कारण उनकी सजा यथावत रखी गई है. कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को आदेश दिया है कि वह इस फैसले का पालन करें. गर्भावस्था और बच्चे के जन्म ने इस घटना की पुष्टि की है. कोर्ट ने कहा कि सिर्फ वीडियो न मिलना या डीएनए रिपोर्ट मैच न होना दोषियों को बचाने के लिए पर्याप्त कारण नहीं है. कानून के मुताबिक, अगर समूह के एक सदस्य ने दुष्कर्म किया और अन्य उसकी मंशा में शामिल रहे, तो सभी दोषी माने जाएंगे. इसलिए पांचों आरोपियों को गैंगरेप का दोषी माना गया।
एक लाख रुपये जुर्माना भी
ट्रायल कोर्ट ने 20 दिसंबर 2023 को विशेष न्यायाधीश, सूरजपुर ने सभी आरोपियों को विभिन्न धाराओं में 4 से 20 साल तक की कड़ी सजा सुनाई थी. आरोपियों को धारा 363/34 में 4 वर्ष, धारा 366/34 में 6 वर्ष, धारा 376 डी में 20 वर्ष, धारा 6 पाक्सो अधिनियम के तहत 20 वर्ष, एससी/एसटी एक्ट के तहत आजीवन कारावास और धारा 67 बी आईटी एक्ट में 5 वर्ष और एक लाख रुपये जुर्माना भी दिया गया था.
