शराब घोटाला: सीएसएमसीएल के पूर्व एमडी अरुणपति त्रिपाठी को जमानत
*10 लाख रुपये के मुचलके और दो जमानतदारों की शर्त पर रिहाई का आदेश;
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मैनपावर सप्लाई और कथित अतिरिक्त भुगतान के मामले में हाईकोर्ट ने सीएसएमसीएल के तत्कालीन प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी को नियमित जमानत दे दी है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने 5 नवंबर को सुनाए आदेश में 10 लाख रुपये के व्यक्तिगत मुचलके और इतनी ही राशि के दो सक्षम जमानतदार प्रस्तुत करने की शर्त पर रिहाई का निर्देश दिया है*
त्रिपाठी 17 जुलाई 2025 से न्यायिक हिरासत में केंद्रीय जेल रायपुर में बंद थे। उन्होंने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत जमानत आवेदन प्रस्तुत किया था*अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2019 से 2023 के बीच छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड (सीएसएमसीएल) के अंतर्गत संचालित शराब दुकानों में कर्मचारियों की आपूर्ति करने वाली एजेंसियों को वेतन, बोनस, ओवरटाइम, सेवा शुल्क और चार अतिरिक्त कार्य दिवसों के नाम पर वास्तविक भुगतान से अधिक राशि दी गई। आरोप है कि अतिरिक्त राशि कर्मचारियों तक नहीं पहुंची, बल्कि नकद निकालकर कथित सिंडिकेट से जुड़े लोगों के बीच बांटी गई। अभियोजन ने आरोप लगाया कि तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी ने इस व्यवस्था को तैयार करने और लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अधिकारियों को ओवरटाइम भुगतान पर आपत्ति दर्ज नहीं करने तथा एजेंसियों के बिलों को तेजी से मंजूरी देने के निर्देश दिए, कथित अतिरिक्त रकम का हिस्सा उन तक और बाद में अनवर ढेबर तक पहुंचने का भी आरोप है।
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि मुख्य आरोपपत्र में 65 गवाहों का उल्लेख है, लेकिन आवेदक के खिलाफ आरोपपत्र अभी दाखिल नहीं किया गया है और अभियोजन के किसी गवाह का परीक्षण भी शुरू नहीं हुआ है* अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि,सह-आरोपियों और अन्य गवाहों के बयानों के अलावा आवेदक की कथित भूमिका साबित करने के लिए कोई अन्य स्वतंत्र दोषसिद्धि योग्य सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं है। चार्जशीट में कमीशन व्यवस्था के बाद के घटनाक्रम, कमीशन में कथित बढ़ोतरी और 29 नवंबर 2023 को 28.80 लाख रुपये के लेनदेन का उल्लेख भी आवेदक की गिरफ्तारी के बाद के समय से संबंधित बताया गया है*अदालत ने जमानत के साथ कड़ी शर्तें लगाई हैं।
कड़ी शर्तें
त्रिपाठी को गवाहों को प्रभावित करने, धमकाने या प्रलोभन देने से प्रतिबंधित किया गया है,उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अदालत की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ सकेंगे* प्रत्येक निर्धारित तारीख पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित रहना होगा तथा जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना होगा* मोबाइल नंबर चालू रखने और मुकदमे की निष्पक्ष सुनवाई में बाधा नहीं डालने की भी शर्त लगाई गई है* किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर राज्य जमानत निरस्त कराने की मांग कर सकेगा।
