मानसिक दिव्यांग किशोरी से दुष्कर्म के आरोपी को 10 वर्ष की कैद
बिलासपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) वंदना वर्मा ने मानसिक रूप से दिव्यांग किशोरी के साथ घर घुसकर दुष्कर्म करने के आरोपी को 10 वर्ष सश्रम कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने पर अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बिल्हा थाना क्ष्ोत्र निवासी मानसिक रूप से दिव्यांग किशोरी 3 मार्च 2024 को दोपहर घर में अकेली थी। उसकी मां ख्ोत गई थी। दोपहर दो बजे वह सोई हुई थी, उसी समय नवागांव निवासी देवी प्रसाद उर्फ बबलू दुबे पिता घनश्याम प्रसाद दुबे उम्र 40 वर्ष घर में घुसकर सोई हुई किशोरी के साथ दुष्कर्म किया। शाम को उसकी मां ख्ोत से वापस आई तो पीड़िता ने उसे आरोपी के हरकत की जानकारी दी एवं दर्द होने की बात कही। इसके बाद पीड़िता की मां आरोपी के घर गई व उसके परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। मामले की बिल्हा थाने में शिकायत की गई। बिल्हा पुलिस ने अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना उपरांत आरोपी के खिलाफ धारा 450, 376(2)(ठ) के तहत जुर्म दर्ज कर न्यायालय में चालान पेश किया गया। पीड़िता के मानसिक दिव्यांग होने पर समाज कल्याण विभाग की सहायता से विदुषी की सहायता ली गई। इसके साथ उसके दिव्यांगता प्रमाण पत्र मनोरोग चिकित्सक की जांच रिपोर्ट के साथ सुनवाई की गई। मामले में आरोपी की ओर से कहा गया कि पीड़िता मंदबुद्बि है किन्तु घर के सभी काम करती है। वह सहमति देने वाली पार्टी है। वही अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक अमित सोनी ने तर्क में कहा कि पीड़िता सहमति देने वाली पक्ष नहीं है। उसे इसके अच्छे बुरे परिणाम होने का ज्ञान नहीं है। वही पीड़िता अपने बयान से नहीं हटी है।
सभी पक्षों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी वंदना वर्मा ने दोषसिद्ब होना पाया। न्यायालय ने पीड़िता के दिव्यांग होने को गंभीर मानते हुए आरोपी को धारा 450 में तीन वर्ष कैद, 100 अर्थदंड एवं धारा 376 (2)(ठ) में 10 वर्ष सश्रम कारावास व 500 रूपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं देने पर अभियुक्त को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। न्यायालय ने सभी सजाएं साथ चलाने का निर्देश दिया है।
