सड़क हादसा में 25 प्रतिशत विकलांग हुई महिला को 19 लाख मुआवजा देने का आदेश बरकरार,
० हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज की
बिलासपुर। सड़क हादसे में घायल महिला को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा दिए गए 19 लाख 20 हजार 900 रुपये के मुआवजे को हाईकोर्ट ने बरकरार रखा है। जस्टिस संतोष शर्मा की एकलपीठ ने मुआवजा बढ़ाने की मांग करने वाली महिला और मुआवजा कम करने की बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी।
मामला 27 जून 2016 का है। योगिता झूलेकर उर्फ योगिता सोनकर अपने पति लेखराम झूलेकर और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भोपाल से राजनांदगांव जिले के ग्राम हालेकोसा लौट रही थीं। सुखतवा के पास नदी के पुल पर उनकी कार के पीछे से तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में योगिता को गंभीर चोटें आईं और उन्हें स्थायी दिव्यांगता हुई। इस मामले में मध्य प्रदेश के केसला थाने में ट्रक चालक के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया था।
द्वितीय अतिरिक्त मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, राजनांदगांव ने योगिता को 19,20,900 रुपये मुआवजा छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ देने का आदेश दिया था। महिला ने मुआवजा बढ़ाने के लिए अपील दायर की। उनके अधिवक्ता योगेश पांडे ने दलील दी कि अधिकरण ने आय का आकलन कम किया और काम से दूर रहने की अवधि के लिए भी पर्याप्त मुआवजा नहीं दिया। वहीं, बीमा कंपनी की ओर से अधिवक्ता उत्सव महिश्वर ने मुआवजा घटाने की मांग करते हुए कहा कि महिला की आय और भविष्य में होने वाली आय की हानि के लिए दिया गया मुआवजा अधिक है।
हाईकोर्ट ने पाया कि महिला ने वर्ष 2015-16, 2016-17 और 2017-18 के आयकर रिटर्न पेश किए थे। इनके आधार पर अधिकरण ने उनकी मासिक आय 35 हजार रुपये आंकी थी। अदालत ने इस आकलन को उचित माना। साथ ही, चिकित्सकीय साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित 25 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता के आकलन में भी हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
जस्टिस संतोष शर्मा ने कहा कि, अधिकरण द्वारा निर्धारित मुआवजा उचित है और उसमें बदलाव की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही योगिता झूलेकर की मुआवजा बढ़ाने की अपील (एमएसी क्र. 605/2019) और श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी की मुआवजा घटाने की अपील (एमएसी क्र. 791/2019) दोनों ही खारिज कर दी गईं*
