फर्जी छत्तीसगढ़ी की जमानत आवेदन खारिज
00 फेक मूल निवास प्रमाणपत्र से आईटीबीपी में नौकरी पाया
बिलासपुर। फर्जी मूल निवास प्रमाणपत्र के आधार पर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में आरक्षक की नौकरी हासिल करने के आरोपित दीपक जाट की जमानत अर्जी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। जस्टिस राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने मामले में आरोपों की गंभीरता को देखते हुए यह आदेश दिया।
अभियोजन के अनुसार, मुंगेली जिले के लालपुर थाने में दीपक जाट के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 3(5) के तहत अपराध दर्ज किया गया है। आरोप है कि उसने लालपुर का निवासी बताकर फर्जी मूल निवास प्रमाणपत्र बनवाया और उसके आधार पर आईटीबीपी में आरक्षक के पद पर नियुक्ति हासिल की।
दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान संबंधित अधिकारियों ने पाया कि दीपक जाट के नाम पर ऐसा कोई मूल निवास प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया था। इसके बाद प्रमाणपत्र को फर्जी पाए जाने पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया। आरोपित की ओर से अधिवक्ता पल्लव मिश्रा ने जमानत आवेदन पेश कर कहा कि वह लालपुर का स्थायी निवासी है और सक्षम प्राधिकारी ने उसके पक्ष में मूल निवास प्रमाणपत्र जारी किया था। उन्होंने यह भी दलील दी कि आरोपपत्र दाखिल हो चुका है, आरोपित 27 जून 2026 से जेल में है और विचारण में लंबा समय लग सकता है। वहीं, शासन की ओर से अतिरिक्त शासकीय अधिवक्ता केशव गुप्ता ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपित ने फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी हासिल की और वह इस मामले में लाभार्थी है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपित पर फर्जी मूल निवास प्रमाणपत्र के जरिए आईटीबीपी में नौकरी हासिल करने का आरोप है। अदालत ने उसे जमानत देने का उचित आधार नहीं माना और गत 16 अक्टूबर 2026 को सुनवाई में उसकी पहली जमानत अर्जी खारिज कर दी।
