दहेज हत्या के आरोपी पति की जमानत याचिका खारिज, पत्नी ने फाँसी लगाकर खुदकुशी की

बिलासपुर। दहेज की मांग को लेकर अपनी पत्नी को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से  प्रताड़ित करने और अंततः उसे आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति की जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि ज़मानत अर्ज़ी पर विचार करते समय एफआईआर दर्ज करने में देरी और गवाहों के बयानों में कथित  विसंगतियों जैसे मुद्दे ट्रायल के दौरान देखे जाने  वाले मामले हैं। उन पर अभी पक्के तौर पर विचार नहीं किया जा सकता।

चीफ़ जस्टिस रमेश सिन्हा, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की  धारा 483 के तहत दायर पहली ज़मानत अर्ज़ी पर सुनवाई कर रहे थे। यह अर्ज़ी आरोपी मुरलीधर बाघ ने दायर की थी जिसे भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 80(2) के तहत सज़ा-योग्य अपराध के लिए गिरफ़्तार किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी और मृतका की शादी घटना से लगभग तीन साल पहले हुई थी और उनसे एक बेटी भी हुई। आरोप है कि आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने मृतका को लगातार शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। यह भी आरोप लगाया गया कि घटना से एक रात पहले आरोपी ने दहेज की मांग को लेकर मृतका से फिर झगड़ा किया और उसके साथ मारपीट की, जिसके बाद उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली

 आरोपी का तर्क था कि घटना के लगभग चार महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई। अस्वाभाविक मौत की जांच के दौरान दर्ज बयानों में दहेज की मांग का कोई आरोप नहीं लगाया गया। कोई सुसाइड नोट या मरने से पहले दिया गया बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) नहीं मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई। राज्य ने इस मांग का विरोध करते हुए कहा कि मृतका ने लगातार शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के कारण आत्महत्या की थी। यह भी बताया गया कि मौत के समय मृतका लगभग 18 से 20 सप्ताह की गर्भवती थी।

kamlesh Sharma

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