अनुकंपा नियुक्ति कर्मचारी की मौत के समय असल हालात के आधार पर तय की जानी चाहिए-हाईकोर्ट
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने एसईसीएल कर्मचारी की बेवा बहू को अनुकंपा नियुक्ति देने एकलपीठ के आदेश के खिलाफ पेश याचिका में पेश याचिका में महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुए कहा कि अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए योग्यता पॉलिसी और कर्मचारी की मौत की तारीख के समय के असल हालात के आधार पर तय की जानी चाहिए, न कि बाद की घटनाओं के आधार पर।
भीमसेन कोल एसईसीएल के कपिलधारा कोलियरी में ड्रिलर के पद में कार्यरत रहा। सेवाकाल के दौरान उनकी 1 मार्च 2015 को मृत्यु हो गई। कर्मचारी की मौत के बाद एसईसीएल प्रबंधन ने उनकी बेवा को पत्र जारी कर कर्मचारी के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति के नाम भ्ोजने या एनसीडब्ल्यूए के अनुसार ०1.07.1996 में निहित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ योग्य आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति या रोजगार के बदले मौद्रिक मुआवजे के लिए आवेदन जमा करने की सलाह दी गई थी। सोनिया बाई ने 27.08.2015 को अपने बेटे बाबूलाल के लिए कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट की अर्ज़ी दी, जो मरे हुए एम्प्लॉई का बेटा था। मैनेजमेंट ने एप्लीकेशन पर विचार किया, लेकिन 10.09.2015 की सूचना के ज़रिए, इस आधार पर दावा खारिज कर दिया गया कि बाबूलाल ने 35 साल की तय ऊपरी उम्र सीमा पार कर ली थी और इसलिए वह कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट के लिए योग्य नहीं था। मृतक की पत्नी सोनिया बाई को 01.07.1996 में निहित प्रावधानों के अनुसार आवश्यक दस्तावेजों के साथ योग्य आश्रित की अनुकंपा नियुक्ति या रोजगार के बदले मौद्रिक मुआवजे के लिए आवेदन जमा करने की सलाह दी गई थी। सोनिया बाई ने 27.08.2015 को अपने बेटे बाबूलाल के लिए अनुकंपा नियुक्ति की अर्ज़ी दी। प्रबंधन ने आवेदन पर विचार किया, लेकिन 10.09.2015 की सूचना के ज़रिए, इस आधार पर दावा खारिज कर दिया गया कि बाबूलाल ने 35 साल की तय ऊपरी उम्र सीमा पार कर ली थी और इसलिए वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए योग्य नहीं था। इस आधार पर आवेदन खारिज किया। प्रबंधन ने उसी समय, श्रीमती सोनिया बाई को बताया गया कि वह नौकरी के बदले पैसे का मुआवज़ा ले सकती हैं। ऐसी सूचना के बावजूद, उन्होंने न तो पैसे का मुआवज़ा चुना और न ही किसी दूसरे आश्रित को कम्पैशनेट अपॉइंटमेंट के लिए नॉमिनेट किया। इसके बाद, लगभग सात साल तक परिवार के किसी भी सदस्य ने कोई कदम नहीं उठाया। इस दौरान, मरे हुए कर्मचारी के बेटे बाबूलाल की 27.02.2022 को मौत हो गई। बाबूलाल की मौत के बाद उनकी पत्नी सुभद्रा कोल ने 2022 में अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन दिया। इसमें कहा गया कि वह मृत कर्मचारी भीमसेन कोल की विधवा बहू बन गई। इस आधार पर अनुकपा नियुक्ति दिए जाने की मांग की। एसईसीएल प्रबंधन ने एनसीडब्ल्यूए के नियमानुसार उसके आवेदन को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ सुभद्रा कोल ने हाईकोर्ट में याचिका पेश की। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सुनवाई उपरांत याचिकाकर्ता को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ एसईसीएल प्रबंधन ने रिव्यू याचिका पेश की। रिव्यू याचिका खारिज होने के बाद प्रबंधन ने डीबी में अपील की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने सुनवाई उपरांत एकलपीठ के अनुकंपा नियुक्ति देने के आदेश को रद्द किया है।
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अनुकंपा नियुक्ति के बदले एक मुश्त मुआवजा आवेदन पर निर्णय करने का निर्देश
कोर्ट कहा कि मामले को खत्म करने से पहले, यह देखना सही है कि रिट पिटीशनर का अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति का दावा खारिज होने से उसे एनसीडब्ल्यूए के लागू नियमों के तहत मिलने वाले दूसरे फायदे लेने से नहीं रोका जाएगा। अगर रिट पिटीशनर लागू पॉलिसी के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के बदले पैसे का मुआवजा पाने के लिए एलिजिबल है, तो उसके लिए सक्षम अथॉरिटी के सामने सही रिप्रेजेंटेशन जमा करने का ऑप्शन होगा। अगर ऐसा कोई रिप्रेजेंटेशन जमा किया जाता है, तो सक्षम अथॉरिटी इस फैसले में किए गए किसी भी ऑब्जवãेशन से प्रभावित हुए बिना, कानून और एनसीडब्ल्यूए के लागू नियमों के अनुसार, जितनी जल्दी हो सके, उस पर विचार करेगी और फैसला करेगी।
