फाइनेंशियल आज़ादी ने लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा दिया है-हाईकोर्ट
०० कोर्ट ने कहा उनका रिश्ता एक वैध सहमति पर आधारित था
०० दोषमुक्ति के खिलाफ पेश अपील खारिज
बिलासपुर। जस्टिस संजय एस अग्रवाल एवं जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की डीबी ने शादी का भरोसा दिलाकर महिला से फिजिकल रिलेश्न बनाने के आरोपी के दोषमुक्ति के खिलाफ पेश अपील को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायदृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि एक या दो दशक पहले, लिव-इन रिलेशनशिप शायद आम नहीं थे। लेकिन अब ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं फाइनेंशियली इंडिपेंडेंट हैं और अपनी शर्तों पर अपनी ज़िंदगी तय करने का सोच-समझकर फ़ैसला लेने की क्षमता रखती हैं। इस फाइनेंशियल आज़ादी ने, दूसरी बातों के साथ-साथ, ऐसे लिव-इन रिलेशनशिप को बढ़ावा दिया है। इसलिए, जब इस तरह का कोई मामला कोर्ट में आता है, तो उसे पांडित्यपूर्ण तरीका नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि कोर्ट ऐसे रिश्ते की लंबाई और पार्टियों के व्यवहार के आधार पर, पार्टियों की ऐसे रिश्ते में रहने की निहित सहमति मान सकता है, भले ही वे इसे शादी के बंधन में बदलने की इच्छा रखते हों या नहीं। इस मामले को देखते हुए, हमारी राय में, अपील करने वाले और दूसरे रेस्पोंडेंट के लंबे समय से चले आ रहे रिश्ते, जिसमें उनके साथ रहने और एक-दूसरे के साथ रहने की स्थिति भी शामिल है, यह अनुमान लगाता है कि उनका रिश्ता एक वैध सहमति पर आधारित था। शादी से इनकार करने के आधार पर, रेप के जुर्म के लिए केस नहीं चलाया जा सकता। इस विषय पर कानून को देखते हुए, हमारा मानना है कि ट्रायल कोर्ट ने बरी करने का फैसला सुनाते समय कोई कमज़ोरी, गैर-कानूनी, गलत काम या गलत न्याय नहीं किया है, जिसके लिए इस कोर्ट को दखल देना ज़रूरी हो। ट्रायल कोर्ट का बरी करने का फैसला सही माना जाता है और अपील को एडमिशन के स्टेज पर ही खारिज किया जाता है।
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मामला यह है
40 वर्षिय पीड़ित ने अप्रैल, 2019 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट रायपुर में एमबीए प्रोग्राम में एडमिशन ली थी। पीड़िता की जान-पहचान साथ पढ़ने वाले आरोपी से हुई। शुरू में, उन्होंने बातचीत की और पढ़ाई के विषयों और कोर्स से जुड़े मामलों पर चर्चा की। इसके बाद, 05.07.2019 को, आरोपी ने उसे दूसरे क्लासमेट्स के साथ पढ़ने के बहाने अपने घर बुलाया। हालांकि, घर पहुंचने पर, उसने पाया कि कोई और स्टूडेंट मौजूद नहीं था। आरोप है कि आरोपी ने उसके साथ फ़्लर्ट करना और उसे छेड़ना शुरू कर दिया। विरोध करने पर आरोपी ने शादी का भरोसा दिलाया एवं पीड़ित से फिजिकल रिलेशन स्थापित किया। इसके बाद दोनों लंबे समय तक रिलेशनशिप
में रहें। पीड़ित जब बार बार शादी के लिए कहती तो आरोपी टालता रहा। अगस्त 2021 में आरोपी नेे फोन से कहा कि उसके तलाकशुदा होने व ईसाई समुदाय से होनेे के कारण माता-पिता इस शादी के लिए तैयार नहीं है। आरोपी ने उन्हें मना लेने की बात कह कर उससे संबंध बनाए रखा था। पीड़िता ने इस मामले की महिला आयोग से शिकायत की इसके बाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। ट्रायल कोर्ट ने सुनवाई में दोनों के बालिग होने एवं आपसी सहमति से संबंध स्थापित होने के आधार पर आरोपी को बरी किया। इसके खिलाफ पीड़ित ने हाईकोर्ट में अपील की थी। हाईकोर्ट ने अपील को खारिज किया है।
