प्रशासनिक अफसरों के साथ पेश हुए दोनों बच्चे
0 मंगलवार शाम को कराई गई काउंसिलिंग0 अगली सुनवाई 2 जुलाई को
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दो नाबालिग बच्चों से जुड़े हैबियस कॉर्पस मामले की सुनवाई के दौरान उनकी भलाई को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दोनों बच्चों की स्वतंत्र काउंसलिंग कराने का निर्देश दिया । इसके साथ आज ही स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी की निदेशक और वरिष्ठ अधिवक्ता नौशिना आफरीन अली ने शाम इनकी काउंसिलिंग कीकोर्ट के आदेश पर दोनों नाबालिगों को मंगलवार को अदालत में पेश किया गया था। बंदी प्रत्यक्षीकरण मामले में कल सोमवार को सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने हिरासत में रखे गए दो नाबालिग बच्चों को अदालत में पेश करने के निर्देश दिए थेइस दौरान कोर्ट ने अंबिकापुर और कोरिया के जिला दंडाधिकारियों की हाजिरी भी जरूरी बताई थी। इसी मामले में आज दोनों बच्चे लाए गए। साथ में कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव ,सरगुजा जिले के एडीएम राम सिंह ठाकुर , महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी तथा चाइल्ड केयर संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सर्वोत्तम हितों का सही आकलन
डिवीजन बेंच ने कहा कि, मामले में आगे बढ़ने से पहले बच्चों से बाल-अनुकूल वातावरण में अलग से बातचीत आवश्यक है, ताकि उनकी इच्छा, मानसिक स्थिति और सर्वोत्तम हितों का सही आकलन किया जा सकेअदालत ने निर्देश दिया कि दोनों नाबालिगों की काउंसलिंग आज ही छत्तीसगढ़ स्टेट ज्यूडिशियल एकेडमी की निदेशक एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नौशिना आफरीन अली द्वारा की जाए । काउंसलिंग सीलबंद लिफाफे में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत जाएगी। आज सुनवाई के दौरान कोरिया की कलेक्टर रोक्तिमा यादव ,सरगुजा जिले के एडीएम राम सिंह ठाकुर , महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी तथा चाइल्ड केयर संस्थानों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
00
सुरक्षित, आरामदायक प्रवास के निर्देश
कोर्ट ने यह भी कहा कि सुनवाई निकट होने के कारण बच्चों को उसी दिन उनके मूल संस्थानों में वापस भेजना व्यावहारिक नहीं होगा। इसलिए बिलासपुर जिला प्रशासन को उनके सुरक्षित एवं आरामदायक ठहरने की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद उन्हें अगले दिन संबंधित चाइल्ड केयर संस्थानों में वापस भेजा जाएगा। खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक नाबालिग बच्चों तथा उपस्थित अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से भी छूट प्रदान कर दी है।

