परिक्रमा पथ निर्माण करने बिना सहमति भूमि अधिग्रहण
0 याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट से मिली राहत
0 कलेक्टर राजनांदगांव को परीक्षण कर निराकरण के निर्देश
बिलासपुर। डोंगरगढ़ के बहुचर्चित परिक्रमा पथ निर्माण हेतु अवैध रूप से याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अधिग्रहित करने के प्रस्ताव एवं प्रस्तुत शिकायत पत्र पर विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं किए जाने के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कलेक्टर राजनांदगांव को पीड़ित याचिकाकर्ता के शिकायत पत्र पर उसको सुनवाई का अवसर देते हुए परीक्षण कर निराकरण किये जाने का निर्देश जारी किया है।
डोंगरगढ़ जिला राजनांदगांव के अंतर्गत बुधवारी पारा वार्ड नंबर 19 डोंगरगढ़ के रहने वाले फहीम अख्तर ने अपने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के मार्फत हाईकोर्ट में इस आशय की याचिका प्रस्तुत की थी कि, उसकी कृषि भूमि ग्राम छीरपानी पटवारी हल्का नंबर 29 खसरा नंबर 196/2 में स्थित है। याचिकाकर्ता को कुछ दिन पूर्व जानकारी मिली कि, उसके उक्त खसरा नंबर की भूमि को प्रस्तावित डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ निर्माण हेतु अधिग्रहित किए जाने कार्यवाही की जा रही हैजबकि याचिकाकर्ता ने इस संबंध में कोई लिखित अथवा मौखिक सहमति नहीं दी थी
वर्तमान में याचिकाकर्ता की उक्त भूमि पर सड़क निर्माण की कार्यवाही किए जाने की तैयारी की जा रही है और याचिकाकर्ता को ज्ञापन जारी कर उसके उक्त कृषि भूमि को मनमाने अत्यधिक कम कीमत पर खरीदने के संबंध में शासन के द्वारा प्रस्ताव भी जारी कर दिया गया है* याचिकाकर्ता अपनी उक्त कृषि भूमि को किसी भी प्रकार से बिक्री नहीं करना चाहता है और ना ही उसके बदले में किसी प्रकार का मुआवजा प्राप्त करना चाहता हैयाचिकाकर्ता ने अपनी आपत्ति पेश करते हुए कलेक्टर जिला राजनांदगांव के समक्ष एक शिकायत पत्र भी पेश किया था कि उक्त प्रस्तावित परिक्रमा पथ के लिए किसी भी प्रकार से निजी भूमि अधिग्रहित करने की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि प्रस्तावित परिक्रमा पथ के आसपास ही पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है जिसके माध्यम से सड़क का निर्माण किया जा सकता हैइसके बावजूद भी स्वीकृत नक्शे के विरूद्ध निजी भूमि का चयन किया जाना अनुचित है कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से याचिकाकर्ता की कृषि भूमि को अधिग्रहित किए जाने का प्रयास किया जा रहा है,यदि सड़क निर्माण उपलब्ध राजस्व भूमि से किया जाता है तो शासन को भूमि अधिग्रहण एवं मुआवजा भुगतान में होने वाले अतिरिक्त व्यय से बचाया जा सकता है, साथ ही साथ परिक्रमा पथ हेतु पूर्व से ही मार्ग बना हुआ है नए मार्ग की कोई आवश्यकता भी नहीं है।
इस प्रकार सार्वजनिक धन की भी मनमाने खर्च हेतु प्रस्तावित किया गया है याचिकाकर्ता ने इस संबंध में शिकायत पत्र भी प्रस्तुत कर निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच किए जाने के संबंध में निवेदन किया था एवं यह भी निवेदन किया था कि उसकी निजी भूमि खसरा नंबर 196/2 ग्राम छीरपानी डोंगरगढ़ स्थित भूमि को प्रस्तावित परिक्रमा पथ निर्माण में ना लिया जावे एवं परिक्रमा पथ निर्माण की संपूर्ण एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए इस बात की भी जांच कराई जाए कि, उपलब्ध शासकीय भूमि से सड़क निर्माण जब किया जा सकता है तब निजी भूमि क्यों अधिग्रहित की जा रही है अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने सुनवाई के बाद कलेक्टर राजनंदगांव को निर्देशित किया है कि,याचिकाकर्ता की शिकायत एवं आपत्तियों का निराकरण व उसके द्वारा प्रस्तुत शिकायत पत्र का निराकरण सुनवाई का अवसर देते हुए विहत अवधि के भीतर करें।
