नियमित नियुक्ति होने तक किसी अधिकारी को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंपना मात्र एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था-हाई कोर्ट
00 छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल में रजिस्ट्रार की नियुक्ति का मामला
बिलासपुर। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार पद को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे अधिकारी को पद से हटाने का निर्देश दिया गया था। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि नियमित नियुक्ति होने तक किसी अधिकारी को रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंपना मात्र एक अस्थायी प्रशासनिक व्यवस्था है, इसे वैधानिक पद पर नियमित नियुक्ति नहीं माना जा सकता। दरअसल मामला अश्वनी गुरडेकर से जुड़ा है, जो मूल रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर अस्पताल रायपुर में फार्मासिस्ट पद पर कार्यरत हैं। राज्य सरकार ने 14 मार्च 2024 को उन्हें छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल के रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। इसके खिलाफ डॉ. राकेश गुप्ता ने याचिका दायर कर दावा किया था कि यह नियुक्ति फार्मेसी काउंसिल नियम, 1978 के प्रावधानों के विपरीत है। सिंगल बेंच ने याचिका स्वीकार करते हुए आदेश निरस्त कर दिया था, जिसके खिलाफ यह रिट अपील दाखिल की गई। डीबी ने कहा कि ‘क्वो वारंटो’ (पद धारण करने के अधिकार की जांच) संबंधी रिट तभी जारी की जा सकती है, जब कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक वैधानिक पद पर नियमित नियुक्ति के आधार पर बैठा हो और उसकी नियुक्ति कानून के विपरीत हो। केवल अतिरिक्त प्रभार दिए जाने को नियमित नियुक्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक रिक्तता से बचने के लिए अस्थायी व्यवस्था करना शासन का अधिकार है और जब तक उसमें मनमानी, दुर्भावना या किसी कानून का स्पष्ट उल्लंघन साबित न हो, तब तक न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने माना कि रजिस्ट्रार पद पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया और नियमों में संशोधन का विषय पहले से विचाराधीन है। ऐसे में अतिरिक्त प्रभार केवल अंतरिम व्यवस्था के रूप में दिया गया था। इसी आधार पर सिंगल बेंच के आदेश को असंगत बताते हुए रद्द कर दिया गया। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि फार्मेसी अधिनियम, 1948 तथा फार्मेसी काउंसिल नियम, 1978 के अनुसार रजिस्ट्रार पद पर नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया आठ सप्ताह के भीतर पूरी करें। तब तक अश्वनी गुरडेकर अतिरिक्त प्रभार के तहत रजिस्ट्रार की जिम्मेदारियां निभाते रहेंगे। आदेश के हेड नोट में भी अदालत ने स्पष्ट किया है कि नियमित नियुक्ति होने तक रजिस्ट्रार का अतिरिक्त प्रभार संभालना किसी वैधानिक पद पर नियमित रूप से आसीन होना नहीं माना जाएगा और ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 226 के तहत ‘क्वो वारंटो’ रिट जारी करने की आवश्यक शर्त पूरी नहीं होती।
