बिलासपुर डीईओ कार्यालय में सीजीपीएफ अकाउंट घोटाला, हाई कोर्ट ने शासन से आरोप पर स्पष्टीकरण मांगा

बिलासपुर। व्याख्याता ने बिलासपुर डीईओ कार्यालय में चल रहे सीजीपीएफ अकाउंट घोटाले को उजागर किया है। व्याख्यात के वेतन से उक्त राशि की कटौती की गई किंतु राशि नियमित रूप से खाते में जमा नहीं किया गया। पीड़ित व्याख्याता ने कोर्ट के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर बिलासपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में चल रहे खेल को उजागर किया है। कोर्ट ने मामले में शासन से स्पष्टीकरण मांगा है।

पी एम श्री स्वामी आत्मानन्द विद्यालय मस्तूरी के व्याख्याता संजय पाण्डेय ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ में याचिका प्रस्तुत कर बताया कि- उनके वेतन से प्रति माह सीजीपीएफ की राशि की कटौती हो रही है ,परन्तु वह राशि उनके सीजीपीए खाते में नियमित तौर पर जमा नहीं हो रही है।

इस विषय में प्राचार्य टी संवर्ग जयप्रकाश ओझा को अनेक अभ्यावेदन दिया गया परन्तु जयप्रकाश ओझा ने न राशि उपलब्ध कराई न ही तत्सम्बन्धित कोई जानकारी दी ।

कोषालय में चालान के माध्यम से जमा की गयी राशि की जानकारी और चालान की प्रति मांगे जाने पर भी प्राचार्य ने व्याख्याता को स्पष्ट मना करते हुए उल्टे व्याख्याता को ही उस पत्र/ नियम की प्रति उपलब्ध कराने हेतु निर्देश दिया जिसके तहत शासकीय कर्मचारी को चालान की प्रति उपलब्ध कराने का प्रावधान है। व्याख्याता संजय पाण्डेय को सूचना के अधिकार के तहत भी प्राचार्य टी संवर्ग जयप्रकाश ओझा ने गबन की गयी राशि की जानकारी नहीं दी । अपीलीय अधिकारी एवं जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने प्राचार्य के इस कृत्य का संरक्षण- संवर्धन किया । व्याख्याता ने कलेक्टर , संयुक्त संचालक शिक्षा रामायण प्रसाद आदित्य और संचालक लोक शिक्षण संचनालय को अभ्यावेदन प्रस्तुत कर गबन की गयी राशि उपलब्ध कराने की मांग की। सक्षम अधिकारियों द्वारा राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने और कोई कार्रवाई नहीं करने से विवश व्याख्याता ने उच्च न्यायालय छत्तीसगढ के समक्ष स्वयं उपस्थित होकर अपने वेतन से गबन की गयी राशि , देय तिथि तक वास्तविक ब्याज के साथ उपलब्ध कराने का निवेदन किया।

न्यायमूर्ति विभु दत्त गुरु की बैंच ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान यह पाया कि याचिकाकर्ता के वेतन से सीजीपीए की राशि की कटौती हुई है, परन्तु वह याचिकाकर्ता के सीजीपीएफ खाते में जमा नहीं हुई है। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन को चार सप्ताह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश जारी करते हुए सुनवाई की अगली तिथि तीस जून तय कर दी। राज्य शासन, कलेक्टर बिलासपुर की ओर से पैरवी अधिवक्ता सुयशधर बड़गंइया ने की।

यह प्रकरण शिक्षा विभाग की जानकारी में बहुत पहले से है परन्तु उच्च अधिकारियों के द्वारा प्राचार्य के इस गलत कार्य को दिए जा रहे संरक्षण की वजह से विभाग की किरकिरी हो रही है। इसके लिए प्राचार्य से ज्यादा उच्च अधिकारी जिम्मेदार माने जा रहे हैं।

kamlesh Sharma

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