बेरहमी और बर्बर तरीके से मां व मासूम बेटी की हत्या ०० हाईकोर्ट ने सजा के खिलाफ पेश अपील को खारिज किया
00 बच्ची को रेल लाइन लेटा कर हत्या की
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डीबी ने अदालत में चल रहे दुष्कर्म के मामले को वापस नहीं लेने पर आरोपी ने महिला की गला रेत कर तथा उसकी मासूम बच्ची को रेल लाइन में लीटाकर हत्या करने के आरोपी की सजा के खिलाफ पेश अपील को खारिज किया है। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपीलकर्ता आरोपी विक्की उर्फ सुखीराम यादव पिता गिरधारी यादव, उम्र 22 साल निवासी उड़िया बस्ती, शिव मंदिर के पास जोरा थाना तेलीबांधा रायपुर का जोरा पारा में रहने वाली नाबालिग से संबंध रहा। इस संबंध से नाबालिग गर्भवती हो गई। आरोपी द्बारा विवाह से इंनकार करने पर पीड़िता ने रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल दाखिल किया। जमानत में रिहा होने के बाद आरोपी पीड़िता से संबंध सुधारने का काम किया। वह पीड़िता को चल रहे मुकदमा वापस लेने के लिए कहा इस पर पीड़िता ने कहा पहले वह कोर्ट में उससे शादी करे फिर वह मुकदमा वापस लेने की बात कही। 22 जनवरी 2022 को आरोपी ने उसे फोन कर मिलने के लिए एकांत में बुलाया एवं फिर से मुकदमा वापस लेने के लिए कहा इस पर पीड़िता ने शादी करने के बाद मुकदमा वापस लेने की बात कही। इसी बात कर आरोपी उसके चाकू से गले व अन्य जगह वार कर हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपी मृतक के साल डेढ़ साल की बेटी का भी गला दबाया। इससे मासूम बच्ची बेहोश हो गई। उसे बेहोशी की हालत में रेल लाइन में लेटा दिया। उसी समय मालगाड़ी के चपेट में आने से बच्ची दो टुकड़ों में कट गई। हत्या के बाद आरोपी ने वारदात में उपयोग किए हुए चाकू को रेलवे के बाउंड्रीवाल के अंदर फेंक दिया। सबूत मिटाने के लिए मृतक एवं अपना मोबाइल तालाब में फेंक दिया। 23 जनवरी 2022 को उसने जोरा के सरपंच के घर जाकर घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरपंच ने मामले की थाने में रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने मामले में चश्मदीद गवाह नहीं होने पर वैज्ञानिक तरीके से विवेचना कर साक्ष्य एकत्र किया। आरोपी के कपड़े, हाथ में लगे खून, मृतका के खून की एफ एसएल जांच कराई। इसके अलावा आरोपी के बताए स्थान से मासूम की दो हिस्सों में शव बरामद किया गया। पुलिस ने बच्चे व आरोपी का डीएनए जांच कराई। डीएन जांच रिपोर्ट में आरोपी को ही बच्ची का जैविक पिता होने की पुष्टि की। मामले में विचारण न्यायालय ने आरोपी को धारा 302 दो बार में आजीवन कारावास, 1000 रू. अर्थदंड एवं 201 में पांच वर्ष 500 रू. अर्थदंड की सजा सुनाई। इसके अलावा आरोपी को पाक्सो एक्ट का भी दोषी ठहराया गया। आरोपी ने सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील पेश की थी। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल ने सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा कि जहां मकसद ठीक से साबित हो जाता है और आरोपी का पिछला क्रिमिनल रिकॉर्ड माना जाता है, और प्रॉसिक्यूशन केस रिकवरी प्रोसीडिग्स, मेडिकल सबूतों, और एफएसएल और डीएनए एनालिसिस सहित साइंटिफिक फाइंडिग्स से और पक्का हो जाता है, वहां आरोपी का दोषी ठहराया जाना पूरी तरह से सही है और गुनाह के अलावा किसी और नज़रिए के लिए कोई गुंजाइश नहीं बचती। आरोपी का एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल कन्फ़ेशन, मेमोरेंडम स्टेटमेंट और उसके बाद मिली चीजें, मेडिकल सबूत एफएसएल रिपोर्ट, डीएनए रिपोर्ट और आस-पास के दूसरे हालात मिलकर एक अटूट चेन बनाते हैं जो साफ तौर पर अपील करने वाले के गुनाह की ओर इशारा करती है। कोर्ट इस बात को भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता कि अपराध कितनी बेरहमी और बर्बर तरीके से किए गए थे। रिकॉर्ड में मौजूद सबूत यह साबित करते हैं कि मृतक रोमा यादव को जानलेवा चोटें पहुँचाकर मार डाला गया था और उसके बाद नाबालिग बच्ची कु. माहिरा यादव को रेलवे ट्रैक पर छोड़ दिया गया था, जबकि उसे इसके होने वाले नतीजों की पूरी जानकारी थी। अपील करने वाले के बताए गए काम पूरी तरह से घटियापन और इंसानी ज़िंदगी की पूरी तरह से अनदेखी दिखाते हैं। ट्रायल कोर्ट ने उसके खिलाफ दोषसिद्धि का फैसला सही तरीके से सुनाया है। इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की अपील को खारिज किया है। .
