निज हित को जनहित बताकर कोर्ट के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल….0 50 हजार रू जुर्माने के साथ हाईकोर्ट से पीआईएल खारिज0 लेमेहई तालाब रायपुर में सीवेज का पानी डालने का मामला

बिलासपुर। रायपुर के एक तालाब में सीवेज का पानी छोड़ने के खिलाफ प्रस्तुत एक जनहित याचिका हाईकोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाकर खारिज कर दीडीबी ने कहा कि,पिटीशनर ने गलत तरीके से पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन फाइल करके, ज़रूरी बातों को दबाकर और अपने पर्सनल इंटरेस्ट को पब्लिक कंसर्न का मामला बताकर इस कोर्ट के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की हैनिषादपारा रायपुर महादेव घाट रोड निवासी अजय कुमार निषाद (46 वर्ष) ने एक जनहित याचिका पेश कर बताया कि रायपुर, वार्ड नंबर 79 (माधवराव सप्रे वार्ड), जिला रायपुर में मौजूद लेमेहई तालाब में बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज का पानी लगातार गिराया जा रहा है* यह तालाब, कम्युनिटी मकसदों के लिए इस्तेमाल होने वाली एक पब्लिक वॉटर बॉडी है, रेजिडेंशियल कॉलोनियों से जुड़े ड्रेनेज चैनलों के ज़रिए बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज के सीधे आने की वजह से बहुत ज़्यादा गंदा हो रहा है, जिससे एनवायरनमेंट खराब हो रहा है और पब्लिक हेल्थ के लिए गंभीर खतरा पैदा हो रहा हैकोर्ट रेस्पोंडेंट्स को ड्रेनेज के पानी के लिए दूसरा इंतज़ाम करने का निर्देश देज़रूरी लीज़ अमाउंट जमा करने में नाकामचीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के बाद कहा कि मौजूदा याचिका, जिसे एक पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन कहा गया है, असल में एक निजी और जानबूझकर की गई शिकायत दिखाती है, जिसमें भारत के संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दखल देने लायक किसी भी वास्तविक लोक अहित का खुलासा नहीं किया गया है* यह साफ है कि याचिकाकर्ता पिछली कार्यवाही से जुड़े ज़रूरी तथ्यों के साथ-साथ इस तालाब से जुड़े टेंडर प्रोसेस में अपनी भागीदारी के बारे में भी बताने में नाकाम रहा है*, रिकॉर्ड से पता चलता है कि पिटीशनर ने मछली पकड़ने के मकसद से तालाब के अलॉटमेंट के लिए टेंडर प्रोसेस में हिस्सा लिया था और उसे एल-1 घोषित किया गया था जिसके तहत उसे तालाब अलॉट किया गया था* वह टेंडर की शर्तों के हिसाब से ज़रूरी लीज़ अमाउंट जमा करने में नाकाम रहा* इस हालात में, पिटीशनर, का मामले में सीधा और मौजूदा पर्सनल इंटरेस्ट है, उसे पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की आड़ में इस कोर्ट के एक्स्ट्राऑर्डिनरी जूरिस्डिक्शन का इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती*सिक्योरिटी डिपॉजिट भी जब्तपिटीशनर ने गलत तरीके से पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन फाइल करके, ज़रूरी बातों को दबाकर और अपने पर्सनल इंटरेस्ट को पब्लिक कंसर्न का मामला बताकर इस कोर्ट के प्रोसेस का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश की है* इसलिए, यह रिट पिटीशन, 50,000 रु कॉस्ट के साथ खारिज की जाती है* यह कॉस्ट पिटीशनर को आज से एक महीने के अंदर इस कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करनी होगी, जिसे बाद में गवर्नमेंट होम फॉर मेंटली अंडरडेवलप्ड चिल्ड्रन, माना कैंप, डिस्ट्रिक्ट रायपुर को भेज दिया जाएगा* तय समय में रकम जमा नहीं करने पर तो इस कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल कानून के मुताबिक इसे लैंड रेवेन्यू के बकाया के तौर पर वसूल करेंगे* यह भी निर्देश दिया जाता है कि, 23.मार्च .2026 को यह अर्जी दाखिल करते समय याचिकाकर्ता द्वारा जमा की गई 15,000 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट रकम जब्त कर ली जाएगी।

kamlesh Sharma

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