छत्तीसगढ़ बोर्ड परीक्षा में फर्जीवाड़ा कर टॉपर बनने वाली पोरा बाई व अन्य को 17 वर्ष बाद सजा हुई

०० सत्र न्यायालय ने कहा आरोपियों ने अपने भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करने वाले छात्रों के साथ भी अपराध किया

बिलासपुर। 17 वर्ष बाद 2008 के 12 वीं बोर्ड परीक्षा में छत्तीसगढ़ टॉपर पोरा बाई व अन्य आरोपियों को जिला अदालत से 5-5 वर्ष कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत से सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जेल दाखिल किया है। इस संबंध में कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में का कि आरोपियों ने केवल माध्यमिक शिक्षा मण्डल के विरुद्ध अपराध नहीं किया बल्कि उन छात्रों के विरुद्ध भी किया है जो अपनी भविष्य के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

2008 में माध्यमिक शिक्षा मंडल के बार्ड परीक्षा में जांजगीर चाम्पा जिला के बिर्रा परीक्षा केन्द्र से पोरा बाई ने 12 की परीक्षा में शामिल हुई। इस परीक्षा में उसने 500 में से 484 अंक प्रा’ कर पूरे प्रदेश में टॉप की थी। उसके टॉप करने पर संदेह व्यक्त करते हुए शिकायत की गई। शिकायत की जांच में पाया गया कि पोरा बाई के रोल नंबर के उत्तरपुस्तिका था उसमें पोरा बाई की हैंडराईटिंग ही नहीं है। किसी अन्य व्यक्ति ने पूरे प्रश्न हल कर जमा किया था। जांच उपरांत पुलिस ने पोरा बाई, फूलसाय नृसिंह, एसएल जाटव, दीपक जाटव के खिलाफ 420, 120 बी, 467, 468 के तहत जेएमएफसी चाम्पा में चालान पेश किया गया। 2020 में जेएमएफसी कोर्ट से आरोपियों के पक्ष निर्णय पारित हुआ। इसके खिलाफ अभियोजन पक्ष ने सत्र न्यायालय में अपील पेश की। सत्र न्यायालय ने अपराध सिद्ब होने पर आरोपितों को 5-5 वर्ष कैद की सजा सुनाई है। अदालत से सजा होने के बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर जेल दाखिल किया है।

kamlesh Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed