संशोधित खबर
हाईकोर्ट ने अवमानना मामला में आईएएस अधिकारियों द्वारा जवाब नहीं देने को गम्भीरता से लिया
०० दोनों अधिकारियों को जमानती वारंट की चेतावनी दी
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट से एसएलपी खारिज होने के बावजूद हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करने को गंभीरता से लेते हुए आईएएस मनोज कुमार पिगुआ और आईएएस किरण कौशल को जमानती वारंट जारी व अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से तलब करने की चेतावनी दी है।
कालेजों में मेडिकल प्रोफ़ेसर, अस्टिटेंट प्रोफ़ेसर, डिमोस्ट्रेटर के पदों पर 15 सालों से संविदा के तौर पर कार्यरत लोगों ने हाईकोर्ट में नियमितिकरण को लेकर याचिका दायर की थी। इनका कहना था कि लंबी सर्विस रिकार्ड के बाद भी सरकार नियमितिकरण पर ध्यान नहीं दे रही जबकि उनकी योग्यता और काम वही है जो नियमित वालों से लिया जाता है। हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला देते हुए वर्ष 2018 में इन्हें नियमित करने कहा था। कालेजों और सरकार की ओर से इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। बाद में वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए तीन महीने में आदेश का पालन करने कहा था। इसके बाद भी सरकार ने ध्यान नहीं दिया। लगातार अदालती आदेश की अवमानना करने पर दिसंबर 2024 में हाईकोर्ट में एडवोकेट सूर्या कन्वलकर डांगी के जरिये अवमानना याचिका लगाई गई। जिस पर लगातार सुनवाई के बाद अधिकारी द्वारा जवाब न देकर लगातार समय लिया जा रहा है। मई 2025 को सुनवाई में अधिकारियों की ओर से समय लिया गया था। आज की सुनवाई में फिर समय दिए जाने की मांग की गई। इसे हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया व आईएएस अधिकारियों को जमानती वारंट करने व अगली सुनवाई में हाईकोर्ट में उपस्थित होने का आदेश करने की चेतावनी दी है।
