पंचायत में समझौते के जरिए दुष्कर्म का मामला दबाया
० सजा पाने वाले आरोपी को 26 वर्ष बाद हाईकोर्ट से राहत
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में पंचायत बुलाकर समझौता कराने और आरोपियों को कानूनी कार्रवाई से बचाने के आरोप में दोषी ठहराए गए आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। आरोपियों ने 2004 में 13 वर्षीय किशोरी के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में समझौता करा पीड़िता के पिता को कुछ रुपये दिलाकर मामले को दबाने का प्रयास किया था।
जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 201 के तहत अपराध साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर पाया। कोर्ट ने निचली अदालत के दोषसिद्धि संबंधी फैसले को निरस्त करते हुए आरोपी की अपील स्वीकार कर ली।
मामला जशपुर जिले का है। अभियोजन के अनुसार, जनवरी 2004 में 13 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म की घटना हुई थी। मामले में आरोप लगा कि घटना के बाद गांव में पंचायत बुलाई गई और पीड़िता के परिवार पर समझौते के लिए दबाव बनाया गया। इस मामले में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, जशपुर ने 19 अप्रैल 2005 को अंजुलुस खलखो को आईपीसी की धारा 201 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन साल के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
