ट्रेन की चपेट में आने से मौत, प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा का भुगतान नहीं
०० उपभोक्ता फोरम ने बीमा कंपनी पर 25 हजार रूपये जुर्माना लगाया
०० 45 दिवस के अंदर बीमा राशि देने का आदेश
बिलासपुर। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बिलासपुर ने लाइन पार करते समय भुज सुपर फास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना से बीमित महिला के आश्रित को बीमा राशि का भुगतान नहीं करने को सेवा में कमी माना है। आयोग ने ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी को 45 दिवस के अंदर 25 हजार रूपये जुर्माना सहित बीमा राशि दो लाख रूपये अप्रैल 2026 से देय दिनांक तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा 5 हजार रूपये अलग से वाद व्यय देना होगा।
आवेदक खुरदुर निवासी नोहर वैष्णव की पत्नी सुनीता वैष्णव की कोटा स्थित पंजाब नेशनल बैंक कोटा में खाता था। उसके खाते से प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के तहत 27 मई 2024 को 20 रूपये कटौती किया गया था। नोहर वैष्णव 11 अगस्त 2024 को अपनी पत्नी सुनीता एवं पुत्र के साथ कृषि कार्य से ख्ोत गया था। वहां से तीनों धान थरहा खरीदने लाइन पार कर एक ख्ोत में गए थ्ो। वापस लौटते समय कलमीटार-करगीरोड के मध्य सुनीता वैष्णव भुज सुपर फास्ट एक्सप्रेस के चपेट में आ गई। उसकी मौके में ही मौत हो गई। पत्नी की मौत के बाद पति ने प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा बीमा योजना के तहत बीमा राशि भुगतान के लिए आवेदन किया। आवेदन को खारिज किए जाने पर पति ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बिलासपुर में आवेदन प्रस्तुत कर बीमा दावा राशि का जुर्माना सहित भुगतान कराने की मांग की।
ओरिएंटल इंश्योरेंस बीमा कंपनी ने जवाब प्रस्तुत कर कहा कि मृतका की कृषि कार्य करते समय ख्ोत में या किसी वाहन के चपेट में आने से मौत नहीं हुई है। रेलवे ट्रेक पार करना अपराध है। मृतका रेलवे के अधिकृत फाटक से लाइन पार नहीं कर रही थी। ट्रेन की आवाज दूर से आती है ऐसे में कोई भी व्यक्ति अपना बचाव करता है सिर्फ आत्महत्या करने वाले नहीं हटते हैं। इस कारण से आवेदन अस्वीकार है। वहीं पीएनबी बैंक ने कहा कि बैंक योजना में सिर्फ राशि कटौती कर बीमा कंपनी को जमा करती है। इस कारण से बैंक की इस भुगतान में कोई भूमिका नहीं होती है।
आयोग के अध्यक्ष आनंद कुमार सिंघल, सदस्य पूर्णिमा सिंह एवं अलोक कुमार पाण्डेय ने बीमा कंपनी, बैंक एवं आवेदक के पक्ष को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि आवेदक की ओर से मर्ग सूचना, पुलिस जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है। इसमें कही भी मृतका के खुदकुशी किए जाने कोई संदेह व्यक्त नहीं किया गया है। मृतका की मौत एक दुर्घटना है। इस लिए बीमा कंपनी ने सेवा में कमी की है। आयोग ने बीमा कंपनी को आदेश प्रा’ होने के 45 दिवस के अंदर आवेदक को बीमा राशि दो लाख रूपये अप्रैल 2026 से भुगतान तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने, 25 हजार रूपये मानसिक अभित्रास एवं 5 हजार रूपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है।

kamlesh Sharma

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