श्री सीमेंट को रेलवे कनेक्टिविटी देने भूमि अधिग्रहण को चुनौती
0 हाईकोर्ट ने किसानों की याचिकाएं खारिज कीं
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को रेलवे कनेक्टिविटी देने के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने 27 अक्टूबर को पारित आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता अधिग्रहण की प्रक्रिया में ऐसी कोई कानूनी त्रुटि या अनियमितता साबित नहीं कर पाए, जिसके आधार पर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हस्तक्षेप किया जा सके।
मामले के अनुसार, रेल मंत्रालय ने 16 जून 2025 को अधिसूचना जारी कर 28 जून को समाचार पत्र में प्रकाशित कराई थी* इसके तहत हथबंध रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन से खपराडीह गांव तक रेलवे ट्रैक बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित था* इसका उद्देश्य गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को रेल संपर्क उपलब्ध कराना था। रवेली सहित आसपास के गांवों के किसानों ने रेलवे अधिनियम की धारा 20-डी के तहत आपत्तियां दर्ज कराईं। उनका तर्क था कि प्रस्तावित अधिग्रहण वास्तविक सार्वजनिक उद्देश्य के बजाय निजी कंपनी श्री सीमेंट को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
किसानों ने यह भी दलील दी कि क्षेत्र में पहले से रेलवे अधोसंरचना उपलब्ध है। अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए रावन से हथबंध क्षेत्र तक रेलवे ट्रैक बनाया जा चुका है और उसके आसपास खाली जमीन भी मौजूद है। श्री सीमेंट ने निजी तौर पर जमीन खरीदकर खपराडीह से रवेली तक रेलवे ट्रैक बनाया है, जिसे मौजूदा रेल लाइन से जोड़ा जा सकता है। किसानों के अनुसार, नई लाइन उनके सिंचित खेतों के बीच से गुजरने के कारण खेती और उत्पादन प्रभावित होंगे। उन्होंने अधिग्रहण अधिकारी के 27 जनवरी 2026 के आदेश को चुनौती देते हुए आपत्तियों पर नए सिरे से विचार करने की मांग की थी।
इससे पहले किसानों ने आपत्तियों पर निर्णय नहीं होने पर हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। 24 सितंबर 2025 को अदालत ने संबंधित अधिकारी को 30 दिनों के भीतर कानून के अनुसार आपत्तियों पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद अधिकारियों ने जवाब प्रस्तुत किया और 27 जनवरी 2026 को आपत्तियां खारिज कर दीं। किसानों ने आरोप लगाया कि उनके प्रमुख तर्कों और वैकल्पिक व्यवस्था की संभावनाओं पर समुचित विचार किए बिना आदेश पारित किया गया। एक अन्य याचिका में यह भी कहा गया कि प्रस्तावित रेल लाइन से कई गांवों के किसानों की कृषि भूमि प्रभावित होगी*हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और रेलवे अधिनियम की धारा 20-ई के तहत घोषणा भी जारी हो चुकी है। इस चरण में पूरी अधिग्रहण प्रक्रिया रद्द करने से बड़े रेलवे बुनियादी ढांचा परियोजना पर असर पड़ेगा, जिससे अनेक गांवों और बड़ी संख्या में भू-स्वामियों के हित प्रभावित हो सकते हैं। अदालत ने यह भी माना कि निजी टर्मिनल संचालक को लाभ मिलने मात्र से रेलवे कनेक्टिविटी की परियोजना सार्वजनिक उद्देश्य की नहीं रह जाती। इस संबंध में कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले का भी उल्लेख किया गया।
एकलपीठ ने कहा कि किसानों को सुनवाई का अवसर दिया गया और उनकी आपत्तियों पर विचार करने के बाद निर्णय लिया गया। इसलिए अधिग्रहण अधिकारी के आदेश या अधिसूचना के तहत शुरू की गई कार्यवाही में हस्तक्षेप का आधार नहीं है* अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाएं खारिज होने से किसानों का मुआवजे के निर्धारण, उसमें वृद्धि या भुगतान तथा रेलवे अधिनियम के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपाय अपनाने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा।
