मौत की तारीख में दोनों दावेदार मृतक की कानूनी तौर पर शादीशुदा पत्नी नहीं थी-हाई कोर्ट
०० कोर्ट ने तीनों बच्चों को मृतक की संपति का हकदार माना
बलिासपुर। जस्टसि पार्थ प्रतमि साहू एवं जस्टसि सुषमा सावंत की डीबी ने मृतक कर्मचारी की दो पत्नी द्बारा संपति एवं सर्विस देयकों पर अपना अपना दावा किये जाने को लेकर पेश अपील में महत्वपूर्ण निर्णय पारित किया है। कोर्ट ने आपने आदेश में कहा कि न तो पहली पत्नी और न ही दूसरी पत्नी, मृतक सुखीदास की मौत की तारीख पर कानूनी तौर पर शादीशुदा पत्नी थीं। कोर्ट ने तीन बच्चे कुमारी लक्ष्मी कुर्रे और कुमारी बेबी उर्फ दीपाली कुर्रे जो दूसरी पत्नी अपीलकर्ता अशोक लता से जन्में हैं, और अवनिाश कुर्रे जो पहली पत्नी से पैदा हुआ जो मृतक सुखीदास के बायोलॉजकिल बच्चे हैं, वे मृतक की अचल प्रॉपर्टी में बराबर हिस्सा के हकदार हैं। , दूसरी पत्नी अपीलकर्ता द्बारा अपने पक्ष में एक्सक्लूसवि राहत के के लिये की गई अपील टकिने लायक नहीं है। पहली पत्नी रेस्पोंडेंट और उसके बेटे के पक्ष में, जहां तक अचल संपत्ति का सवाल है, ट्रायल कोर्ट द्बारा दी गई राहत को ऊपर बताई गई सीमा तक बदला जा सकता है, और यह राहत संबंधति बेटे अवनिाश कुर्रे को कानूनी रूप से उपलब्ध अधकिारों की सीमा तक ही सीमति रहेगी। सर्विस से जुड़े पैसे के बकाए का सवाल है, ट्रायल कोर्ट द्बारा दी गई डक्लिेरेटरी राहत को ज़रूरी कॉन्सक्विेंशयिल राहत और एड वैल्यूरम कोर्ट फीस की कमी के कारण बनाए नहीं रखा जा सकता है। पार्टियों को इंडयिन सक्सेशन एक्ट, 1925 के पार्ट एक्स के तहत मौजूद उपाय का इस्तेमाल करने की आज़ादी होगी, ताकि इसके दायरे में आने वाले बकाए के संबंध में सही सक्सेशन सर्टफिकिेट मिल सके। मृतक सुखीदास के दोनों पत्नी से पैदा हुए तीनों बच्चों को उनकी अचल संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा।
मामला यह है
अपीलकर्ता श्रीमती अशोक लता मृतक स्व. सुखीदास की दूसरी पत्नी थी। अपीलकर्ता दूसरी पत्नी के कुमारी लक्ष्मी एवं बेबी उर्फ दीपाली बेटी हैं। स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे सरकारी कर्मचारी थे और असिस्टेंट वेटरनरी एरिया ऑफिसर राजनांदगांव के पद पर थे और 12 अगस्त 2015 को उनकी मृत्यु हो गई। फेमिली ट्री इस तरह है:-स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे (मृत) पहली पत्नी: शोभा साहू, दूसरी पत्नी: अशोक लता कुर्रे (अपीलकर्ता) पहली पत्नी शोभा से बेटा- अवनिाश कुर्रे व दूसरी पत्नी से बेटियां- लक्ष्मी और बेबी दीपाली है। अपील में कहा गया कि पहली पत्नी ने शादी का घर छोड़ दिया और 10 जुलाई 2000 को कंसेंट डीड किया। स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे के साथ उनके झगड़े के नपिटारे के बारे में। इसके अलावा अलगाव के बाद, उसने अरुण साहू नाम के एक व्यक्ति से दोबारा शादी कर ली और इस शादी से एक बेटा भी पैदा हुआ। इस बीच, स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे को एक पेपर पब्लकिेशन कर पहली पत्नी के साथ उनकी शादी टूट गई है और वह उन्हें अपनी सारी प्रॉपर्टी से बेदखल कर रहे हैं।
पहली पत्नी से अलग होने के बाद स्व. सुखीदास ने अपीलकर्ता से दूसरी शादी की व दोनों बेटियों का जन्म हुआ। सुखीदास की मौत के बाद न्यायालय में मुकदामा दायर कर स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे के जीवनकाल में उनके साथ रहे और इस तरह, वे पूरी तरह से स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे पर निर्भर हैं। इस दलील के आधार पर, अपीलकर्ता ने ट्रायल कोर्ट से स्वर्गीय सुखीदास कुर्रे के उत्तराधकिारी होने के नाते मुकदमे की प्रॉपर्टी पर हक की घोषणा की मांग की।
ट्रायल कोर्ट ने दलीलों और लिखे हुए बयान के साथ-साथ रिकॉर्ड पर मौजूद सबूतों के आधार पर, मुद्दे तय किया और मामले के तथ्यों और हालात पर ठीक से विचार करने के बाद अपील करने दायर मुकदमे को आंशिक रूप से खरिज कर दिया और बचाव पक्ष दूसरी पत्नी व बेटे द्बारा दायर काउंटर-क्लेम को आंशकि रूप से इस तरह दर्ज करके मंज़ूरी दी। इसके खलिाफ पहली पत्नी ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत कर स्व.सुखीदास की अचल संपति एवं सर्विस से प्राप्त
होने वाले राशि पर अपना दावा पेश की थी। सुनवाई में कोर्ट ने पाया कि न तो पहली पत्नी और न ही दूसरी पत्नी, मृतक सुखीदास की मौत की तारीख पर कानूनी तौर पर शादीशुदा पत्नी थीं। कोर्ट ने तीनों बच्चों को मृतक की संपति का बराबर हिस्सेदार माना है।
