सर्फदंश घोटाला, वकील, रीडर व टाईपिस्ट की नियमित जमानत मंजूर
बिलासपुर। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की सिंगल बेंच ने सांप काटने या जहरीले जीव के काटने से मौत पर मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में कथित धोखाधड़ी के मामले में तीन आरोपियों की नियमित जमानत मंजूर कर ली है* आकाश कुमार साहू, हीरा प्रसाद खांडेकर और हरिशंकर राठौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 483 के तहत जमानत आवेदन पेश किया था।
तीनों आवेदन एक ही अपराध क्रमांक से संबंधित होने के कारण संयुक्त रूप से सुने गए। अभियोजन के अनुसार, बिलासपुर तहसीलदार कार्यालय के नायब नाजिर ग्रेड-दो दौलत राम ठाकुर की शिकायत पर सरकंडा थाने में मामला दर्ज किया गया था* आरोप है कि तीनों आवेदकों ने तीन अन्य आरोपियों के साथ मिलकर सरकारी सहायता योजना के तहत चार लाख रुपये प्राप्त करने के लिए फर्जी दस्तावेज और मेडिकल रिकॉर्ड तैयार किए तथा सरकारी अभिलेखों में हेराफेरी की। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का आरोप है। आवेदकों की ओर से अधिवक्ता रवीश वर्मा, अधिवक्ता सुमित झावर के साथ अधिवक्ता यतिका वर्मा तथा अधिवक्ता श्याम कुमार ने पैरवी की। उन्होंने कहा कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है और सहायता राशि संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों की जांच के बाद स्वीकृत की थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण सांप का काटना दर्ज है* बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपियों की कथित भूमिका और धोखाधड़ी के आरोपों का परीक्षण विचारण के दौरान होना चाहिए तथा उन्हें लगातार जेल में रखना उचित नहीं है। आवेदक वकील, रीडर व कम्प्यूटर टाईपिस्ट का काम करते है।
राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता जितेंद्र श्रीवास्तव ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि आरोपियों ने सह-आरोपियों के साथ मिलकर मौत का वास्तविक कारण छिपाकर सरकारी योजना के तहत चार लाख रुपये की सहायता राशि धोखे से प्राप्त की। इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
हाईकोर्ट ने केस डायरी, आरोपों की प्रकृति, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आरोपियों की हिरासत अवधि पर विचार करते हुए जमानत मंजूर की। कोर्ट ने कहा कि आरोपों का परीक्षण विचारण के दौरान किया जाएगा और मुकदमा पूरा होने में समय लगने की संभावना को देखते हुए लगातार हिरासत में रखने का औचित्य नहीं है। तीनों आरोपियों को संबंधित विचारण न्यायालय की संतुष्टि के लिए 50 हजार रुपये का व्यक्तिगत मुचलका प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का निर्देश दिया गया है। उन्हें पुलिस पूछताछ के लिए उपस्थित रहने, गवाहों को प्रभावित नहीं करने और निष्पक्ष व शीघ्र विचारण में बाधा नहीं डालने की शर्तों का पालन करना होगा। उल्लेखनीय है इस मामले पहले ही पीएम करने वाले डॉक्टर को हाई कोर्ट से जमानत मिल गई है।

kamlesh Sharma

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