बीमा की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो वहाँ ’’पे एंड रिकवर’’ का आदेश लागू होगा
00 मोटर दुर्घटना दावा आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी की अपील पर महत्वपूर्ण निर्णय
बिलासपुर। जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने मोटर दुर्घटना दावा के मामले में अंबिकापुर क्लेम ट्रिब्यूनल के आदेश के खिलाफ बीमा कंपनी द्बारा पेश अपील में महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा कि दुर्घटना के समय वाहन का वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं होना बीमा शर्त का उल्लंघन है। बीमा की शर्तों का उल्लंघन होता है, वहाँ ’’पे एंड रिकवर’’ का ऑर्डर देना सही है,बीमा कंपनी क्लेम राशि का भुगतान करने के बाद वाहन मालिक से उक्त राशि को वसूल कर सकता है।
मामला यह है
15 दिसंबर 2015 को मृतक मनीष दुबे मोटरसाइकिल पर जा रहे थे, रास्ते में टाटा टिपर क्रमांक सीजी 12-एस-1906 का चालक अमित कुमार मिश्रा तेज़ी और लापरवाही से चलाते हुए ठोकर मार दिया। दुर्घटना में मनीष दुबे को गंभीर चोटें आईं और 16 दिसंबर 2015 को उनकी मौत हो गई। घटना के संबंध में, पुलिस स्टेशन कटघोरा, कोरबा में धारा 304-ए के तहत केस दर्ज किया गया था, और जांच के बाद चार्जशीट फाइल की गई। मामले में मृतक मनीष दुबे की मां शिवदेवी, पत्नी ज्योति दुबे, नाबालिग पुत्र प्रभात दुबे ने मोटर व्हीकल्स एक्ट, 1988 के सेक्शन 166 के तहत मुआवज़े के लिए क्लेम एप्लीकेशन फाइल किया। क्लेम ट्रिब्यूनल ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ 61,53,240/- (ब्याज के साथ) का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके खिलाफ नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील प्रस्तुत कर कहा कि दुर्घटनाकारित वाहन मालिक व चालक ने इंश्योरेंस पॉलिसी शर्त का उल्लंघन किया है। दुर्घटना के समय वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं था। इसलिए बीमा कंपनी पर मुआवजा राशि की देनदारी नहीं है।
जस्टिस संजय कुमार जायसवाल ने बीमा कंपनी एवं शासन के पक्ष को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि दुर्घटना के समय दोषी गाड़ी के पास वैलिड फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं था, और परीद पिल्लई बनाम ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, एक्सीडेंट के समय वैलिड फिटनेस न होना इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन माना जाता है। ट्रिब्यूनल का यह नतीजा कि इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का कोई उल्लंघन नहीं हुआ था, गलत है। इसलिए, उस नतीजे को खारिज किया जाता है, और यह माना जाता है कि दोषी गाड़ी के ऑपरेशन में इंश्योरेंस पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन हुआ था; इसलिए, अपील करने वाली इंश्योरेंस कंपनी अपनी ज़िम्मेदारी से बरी होने की हकदार है। वही कोर्ट ने अमृत पॉल के मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, जहाँ फिटनेस सर्टिफिकेट या परमिट न होने की वजह से इंश्योरेंस की शर्तों का उल्लंघन होता है, वहाँ ’’पे एंड रिकवर’’ का ऑर्डर देना सही माना जाता है, यह देखते हुए कि नियम तोड़ने वाली गाड़ी का इंश्योरेंस हुआ था। इसलिए, ऊपर बताए गए फैसले को देखते हुए, यह निर्देश दिया जाता है कि अपील करने वाली इंश्योरेंस कंपनी पहले क्लेम करने वालों को तय मुआवज़े की रकम का पेमेंट करे, जिसे वह बाद में नियम तोड़ने वाली गाड़ी के रजिस्टर्ड मालिक और ड्राइवर से वसूल कर सकती है।
