हाईकोर्ट ने एनडीपीएस मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाया ०० 14 वर्षीय बच्चे 10 घंटे तक थाने बैठाकर रखा गया
०० कोर्ट ने पूछा देहाती नालिश दर्ज करने वाले शैलेन्द्र सिंह को जांच अधिकारी कैसे बनाया गया
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने एक एनडीपीएस मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए डीजीपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें कहा गया है कि जिस पुलिस अधिकारी शैलेंद्र सिह ने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर एफआईआर हुई, उसी अधिकारी को मामले की जांच करने और चार्जशीट पेश करने की अनुमति कैसे दी गई। मामला बिलासपुर के सरकंडा थाना क्षेत्र में 2925 क्लोनाजेपाम (रिवोट्रिल) गोलियों की बरामदगी से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है, यह प्रकरण पारिवारिक विवाद के चलते महिला को फंसाने के लिए साजिश के तहत बनाया गया है। कोर्ट ने मामले में संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर, अगली सुनवाई में व्यक्तिगत या वकील के माध्यम से उपस्थित होने को कहा है। याचिका की अगली सुनवाई 24 अगस्त को होगी।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि कथित प्रतिबंधित दवाओं वाला पॉलीथिन बैग महिला को सीधे नहीं मिला था। करीब 14 वर्ष के एक नाबालिग बच्चे को पतंग उड़ाते समय यह बैग घर की छत पर मिला था। बच्चे ने दवाओं के बारे में मोबाइल पर जानकारी जुटाने के बाद अपनी मां को बताया। परिवार का कहना है कि बैग को अनचाही वस्तु समझकर सीढ़ियों के पास कचरे के स्थान पर रख दिया गया था। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है, 14 वर्षीय बच्चे के खिलाफ कोई एफआईआर नहीं होने के बावजूद उसे पुलिस थाने ले जाकर 10 घंटे तक बैठाकर रखा गया। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि दवाओं के स्रोत, बैग को छत पर रखने वाले व्यक्ति, संबंधित लोगों की भूमिका और महिला की गिरफ्तारी की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने बच्चे का मोबाइल भी फोरेंसिक जांच के लिए उपलब्ध कराने की बात कही है।
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विस्तार से जानकारी देने का निर्देश
याचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई। बेंच ने डीजीपी को व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल कर यह बताने कहा है, शैलेंद्र सिह, जिसने कथित तौर पर देहाती नालिश दर्ज कराई और जिसके आधार पर एफआईआर हुई, उसे ही मामले की जांच करने की अनुमति कैसे दी गई? जांच अधिकारी ने आगे जांच पूरी कर महिला के खिलाफ
चार्जशीट कैसे पेश कर दी? कोर्ट ने डीजीपी को शैलेंद्र सिह के पिछले आचरण के संबंध में भी व्यक्तिगत शपथ पत्र के साथ विस्तार से जानकारी देने का निर्देश दिया है। ध्यान रहे कि देहाती नालिश अपराध स्थल पर या थाने पहुँचने से पहले, पीड़ित या गवाह द्बारा पुलिस अधिकारी को दिया गया शुरुआती मौखिक या लिखित बयान है। इसे स्थानीय व सरल भाषा में घटनास्थल पर ही दर्ज किया जाता है, जो बाद में मुख्य प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) का आधार बनता है।
