नए जिले में पुरानी वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता० पुलिस आरक्षकों की वरिष्ठता सूची नए सिरे से बनाने के निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में आरक्षकों की वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि अपनी इच्छा से एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित होने वाले कर्मचारी को नए जिले में पुरानी वरिष्ठता का लाभ नहीं दिया जा सकता। जस्टिस बिभु दत्ता गुरु की एकल पीठ ने गत 11 अगस्त 2026 को एक साथ सुनी गई सभी संबंधित रिट याचिकाओं का निराकरण करते हुए वरिष्ठता सूची और उसके आधार पर तैयार फिट सूची को निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया। मामला मुख्य रूप से जिला कोरबा में आरक्षकों की प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति के लिए तैयार वरिष्ठता/ग्रेडेशन सूची से जुड़ा था।याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्होंने करीब 16-17 वर्ष सेवा पूरी कर ली है, लेकिन वरिष्ठता सूची तैयार करने के तरीके के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं मिल रही है* उनका आरोप था कि आपत्ति दर्ज कराने के बावजूद विभाग ने वैधानिक प्रावधानों और स्थानांतरण की परिस्थितियों पर उचित विचार किए बिना उनकी आपत्तियां खारिज कर दीं*एसओपी को हाईकोर्ट पहले ही निरस्तयाचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता धीरज वानखेड़े, ए एन पांडेय ने विशेष रूप से तर्क दिया कि दूसरे जिलों से स्थानांतरित होकर कोरबा आए कुछ आरक्षकों को उनकी मूल नियुक्ति की तारीख के आधार पर वरिष्ठता सूची में ऊपर रखा गया* उनका कहना था कि, 6 अगस्त 2021 की पुरानी एसओपी को हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है और 13 फरवरी 2026 को संशोधित नियम 16-ए लागू हो चुका है* यह नियम प्रधान आरक्षक और एएसआई पदों पर पदोन्नति के लिए वरिष्ठता निर्धारण की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है*हाईकोर्ट ने कहा कि, 13 फरवरी 2026 को राजपत्र में प्रकाशित संशोधित नियम 16-ए के बाद वरिष्ठता का निर्धारण उसी वैधानिक प्रावधान के अनुसार किया जाना आवश्यक है* केवल इस आधार पर कि किसी कर्मचारी की मूल नियुक्ति पहले हुई थी या उसकी सेवा निरंतर रही है, उसे स्थानांतरित जिले में पुरानी वरिष्ठता नहीं दी जा सकती* कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सेवा की निरंतरता और स्थानांतरित जिले के कैडर में अंतर-से वरिष्ठता दो अलग-अलग विषय हैं* कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी अपनी इच्छा से दूसरे जिले या कैडर में स्थानांतरित होता है तो उसे स्थानांतरण की तारीख तक की वरिष्ठता छोड़नी होगी और नए जिले में संबंधित श्रेणी के सबसे कनिष्ठ कर्मचारी के नीचे रखा जाएगा* कोर्ट ने पाया कि अप्रैल 2026 में तैयार ग्रेडेशन सूची में यह अंतर नहीं किया गया कि कर्मचारी उसी जिले के हैं, प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित हुए या अपनी इच्छा से दूसरे जिले में आए हैं* यह कार्रवाई संशोधित नियम 16-ए के विपरीत पाई गई।
ग्रेडेशन सूची और फिट सूची निरस्त हाईकोर्ट ने इसके चलते 13 फरवरी 2026 के बाद तैयार वरिष्ठता/ग्रेडेशन सूची और उसके आधार पर बनाई गई फिट सूची को निरस्त कर दिया। राज्य को निर्देश दिया गया है कि नियम 16-ए के अनुसार नए सिरे से वरिष्ठता निर्धारित कर संशोधित सूची और फिट सूची तैयार करे तथा इसके बाद पदोन्नति की प्रक्रिया पूरी करे, हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस आदेश से किसी याचिकाकर्ता को स्वतः पदोन्नति का अधिकार नहीं मिलेगा; प्रत्येक कर्मचारी की पात्रता, उपयुक्तता और अन्य निर्धारित शर्तों के आधार पर ही निर्णय लिया जाएगा।
