बिना पुलिस सत्यापन के तैनाती, नियम ताक पर: कौशिक ने स्वास्थ्य विभाग को घेरा

00 नियमों की अनदेखी कर एजेंसी को फायदा पहुंचाने का  आरोप

00 विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह द्वारा आसंधी से सख्ती से कार्यवाही कर, टेंडर पर रोक लगाने का आदेश दिया

बिलासपुर। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक ने विधानसभा में चल रहे मानसून सत्र के तीसरे दिन सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ष 2023 से जून 2026 तक स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों और संस्थानों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों की संख्या, उनकी तैनाती और पुलिस सत्यापन की स्थिति की जानकारी सरकार से मांगी। श्री कौशिक ने सवाल करते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेज में लगे कॉल मी के लोग महिलाओं की सोने की बालियां चुरा रहे हैं। लोगों के साथ गुंडागर्दी कर रहे हैं। इसके बाद भी निजी स्वार्थ के लिए उसको काम दिया जा रहा है। इन कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा है सरकार ने पहले केवल 40 कर्मचारियों का ही पुलिस सत्यापन होने की जानकारी दी थी, जबकि सभी कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य है। वर्ष 2024 से जून 2026 तक बिना पुलिस सत्यापन वाले कर्मचारियों को कितना भुगतान किया गया ।साथ ही यह भी पूछा कि यदि पुलिस सत्यापन अनिवार्य था तो अब तक सभी कर्मचारियों का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया।

श्री कौशिक ने यह भी पूछा कि प्लेसमेंट एजेंसी को कर्मचारियों के भुगतान के लिए 14 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जारी की गई। अनुबंध की शर्तों का पालन किए बिना भुगतान किए जाने की जिम्मेदारी किसकी है और इस वित्तीय अनियमितता के लिए कौन अधिकारी उत्तरदायी है। उन्होंने 20 जून 2026 तक किए गए भुगतान का विस्तृत विवरण भी मांगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों का सत्यापन कराना जरुरी है। यदि अनिवार्य पुलिस सत्यापन के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी और तत्काल इस पर रोक लगाने की बात कही। इस मौके पर ही विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह आसंधी से ही हो रही अनियमितताओं पर सख्ती से कार्यवाही करने और टेंडर पर रोक लगाने के आदेश दिए।

श्री कौशिक ने कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान में, जहां हजारों की संख्या में गंभीर रोगी और उनकी दर्जे की इमारतें हैं, वहां सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी कमी प्रबंधन को खतरे में डालकर खड़ी की गई है। उन्होंने कहा कि केवल टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों को तक बनाए रखने वाली एजेंसी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार होना चाहिए ताकि भविष्य में भर्ती की सुरक्षा से ऐसी कोई गलती न हो सके।

kamlesh Sharma

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