• चरित्रशंका पर पत्नी की हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास

बिलासपुर। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती छाया सिंह ने चरित्रशंका पर पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने के आरोपी पति को आजीवन कारावास एवं 100 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय में मामले को अंतिम बार दोनों के साथ होने उसके बाद पत्नी की संदिग्ध हालत में शव मिलने को परिस्थितिजन्य साक्ष्य की श्रृखला में महत्वपूर्ण कड़ी माना है।

रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कर्रा निवासी आरोपी घासीराम उर्फ खोरबहरा यादव अपनी पत्नी पुनीता यादव के चरित्र पर शंका करता था। इसी बात को लेकर उसने 25-26 सितंबर 2024 की रात को अपनी पत्नी पुनीता यादव की गला दबाकर हत्या कर दी। 26 सितंबर की सुबह दरवाजा नहीं खोलने पर उसके पुत्र कृष्णा यादव ने गांव के कटोवार को यह जानकारी दी कि उसके पिता ने मां की हत्या कर दिया व दरवाजा नहीं खोल रहा है। इस पर कोटवार उसके घर जाकर दरवाजा खोलने कहा, इस पर आरोपी ने पुलिस बुलाने की बात कहते हुए दरवाजा खोलने से इंकार किया। इस पर कोटवार एवं अन्य गवाहों ने खिड़की से झांकर अंदर देखा। इसमें पुनीता की शव सोफा में रखा था व उसके ऊपर चादर से ढ़का था। पुलिस मौके में पहुंचकर पंचनामा एवं गवाहों का बयान दर्ज किया। पूछताछ में आरोपी ने गांव के लोगों से बात करने के लिए मना करने के बाद भी नहीं मानने पर गला दबाकर हत्या करने की बात स्वीकार की। पीएम रिपोर्ट में भी गला दबाने से मौत होने की पुष्टि की गई। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 103 के तहत अपराध पंजीबद्ध कर न्यायालय में चालान पेश किया। पंचम अपर सत्र न्यायाधीश श्रीमती छाया सिंह ने सुनवाई में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के तर्क को अमान्य करते हुए सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न न्यायदृष्टांत का उल्लेख करते हुए कहा कि मामले में परिस्थितिजन्य साक्ष्य आरोपी के विपरीत है। दोनों को अंतिम बार एक साथ देखा गया था। इसके बाद पत्नी की लाश पाई गई। पीएम रिपोर्ट में भी हत्या की पुष्टि की गई है। इस आधार पर दोष सिद्ब पाया। अदालत ने आरोपी पति को आजीवन कारावास एवं 100 रूपेय अर्थदंड की सजा सुनाई है।

kamlesh Sharma

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