हाईकोर्ट ने गांजा जप्ती मामले में प्रक्रिया का पालन नहीं करने पर डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस को फटकार लगाई

०० मुख्य आरोपी कस्टडी से कैसे भागा इसकी डायरेक्टर जनरल को जांच का निर्देश

०० आदेश की प्रति दिल्ली भेजा जाएगा

बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने भारी मात्रा में मादक पदार्थ जप्ती मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कोर्ट की अंतरात्मा को और झटका इस बात से लगा कि मुख्य आरोपियों में से एक, बंदरी चंद्रशेखर उर्फ पिटू, डीआरआई ऑफिस की कस्टडी से भागने में कामयाब रहा। कोर्ट ने डायरेक्टर जनरल, डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, नई दिल्ली की निगरानी में ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों के व्यवहार की पूरी जांच करेंगे, जिसमें डीआरआई ऑफिस से आरोपी के भागने के हालात भी शामिल होंगे, गलती करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे और कानून के मुताबिक सही कार्रवाई करेंगे।

मामला यह है

03 अक्टूबर 2021 को, राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के खुफिया अधिकारी को एक गुप्त सूचना मिली कि, ट्रक नंबर एपी 39 टीपी 9706 के ज़रिए अवैध प्रतिबंधित पदार्थ (गांजा) ले जाया जा रहा है और एक महिद्रा एक्सयूवी गाड़ी इसे चला रही है और यह आंध्र प्रदेश से भवानी पटना, जूनागढ़, नवागांव (ओडिशा) और गरियाबंद होते हुए मथुरा यूपी जा रहा है और संदिग्ध गाड़ी को दोपहर 11:00 से 2:00 बजे तक गरियाबंद पहुंचना है। फिर सर्च पार्टी गरियाबंद के टूरेंगा फॉरेस्ट पोस्ट की ओर बढ़ी। दोपहर करीब 1:30 बजे एक संदिग्ध ट्रक वहां आया और सर्च पार्टी ने उसे रोक लिया। ट्रक के ड्राइवर ने अपना नाम बंदरी चंद्रशेखर और दूसरे व्यक्ति ने अपना नाम भूपेंद्र सिह बताया। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रक की बॉडी में गांजा भरा हुआ है, जिसे मुरमुरे की बोरियों के नीचे रखा गया था। टीम ने ट्रक को मौके में जांच व कार्रवाई करने के बजाय वाहन को डेढ़ सौ किलो मीटर दूर रायपुर डीआरआई के ऑफिस लाया गया। ट्रेक का फलो कर रहा एक्सयूवी वाहन चालक एवं इसमें सवार लोग भागने में सफल हो गए। टीम ने ट्रक से 833.271 किलो ग्राम गांजा ज’ किया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी डीआरआई के कार्यालय से फरार हो गया। टीम ने कार्यवाही कर न्यायालय में डोरीलाल, चंद्रवीर पिटू, अमित कुमार, भूपेंद्र सिह और तुम्माला वेकेटेश्वर राव को गिरफ्तार कर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने सभी आरोपियों को 15-15 वर्ष कैद एवं डेढ़-डेढ़ लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई। सजा के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। हाईकोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी करते हुए डीआरआई की जांच पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है।

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एनडीपीएस एक्ट में कानून द्बारा तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत

कोर्ट ने इस संबंध में नाराजगी व्यक्त करते हुए नर्देश जारी कर कहा एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच के लिए सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड की निष्पक्षता, प्रोफ़ेशनलिज़्म और कानून द्बारा तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की ज़रूरत होती है, और इससे कोई भी चूक न सिर्फ़ आरोपी के अधिकारों को खतरे में डालती है, बल्कि क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की विश्वसनीयता को भी गंभीर रूप से कम करती है और एक्ट के मकसद को ही नाकाम कर देती है। इस कोर्ट की अंतरात्मा को और झटका इस बात से लगा कि मुख्य आरोपियों में से एक, बंदरी चंद्रशेखर उर्फ पिटू, डीआरआई ऑफिस की कस्टडी से भागने में कामयाब रहा। अगर कोई आरोपी जिस पर कमर्शियल क्वांटिटी में नशीली दवाओं की तस्करी का आरोप है, जांच एजेंसी की जगह से भाग सकता है, तो यह एजेंसी के अंदर सतर्कता, निगरानी और संस्थागत अनुशासन की पूरी तरह से कमी को दिखाता है। ऐसी घटना, जब इस मामले में देखे गए कई कानूनी उल्लंघनों के साथ देखी जाती है, तो यह जांच को जिस तरह से हैंडल किया गया था, उसकी एक बहुत ही परेशान करने वाली तस्वीर पेश करती है। यह कोर्ट ऐसी गंभीर गलतियों को नज़रअंदाज़ नहीं होने दे सकता। रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह इस फैसले की एक कॉपी तुरंत डायरेक्टर जनरल, डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस, नई दिल्ली को उनके पर्सनल ध्यान के लिए भेजे। डायरेक्टर जनरल जांच की निगरानी के लिए ज़िम्मेदार सभी अधिकारियों के व्यवहार की पूरी जांच करेंगे, जिसमें डीआरआई ऑफिस से आरोपी के भागने के हालात भी शामिल होंगे, गलती करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करेंगे और कानून के मुताबिक सही कार्रवाई करेंगे। डायरेक्टर जनरल यह भी पक्का करेंगे कि सही इंस्टीट्यूशनल सुरक्षा उपाय, निगरानी के तरीके और समय-समय पर ट्रेनिग प्रोग्राम हों ताकि एनडीपीएस एक्ट के तहत जांच आगे से उतनी ही सावधानी, निष्पक्षता और सख्त कानूनी नियमों का पालन करते हुए की जा सके जितनी एक बड़ी राष्ट्रीय जांच एजेंसी से उम्मीद की जाती है।

kamlesh Sharma

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