स्कूल में कॉमर्स विषय का एक भी छात्र नहीं, ऐसी स्थिति में शिक्षकों को खाली रखना सही नही-हाई कोर्ट

00 तबादला के खिलाफ पेश याचिका खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ‘युक्तिकरण नीति’ के तहत व्याख्याताओं के तबादले को सही ठहराया है* चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने दो महिला व्याख्याताओं की रिट अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि स्कूल में कॉमर्स विषय का एक भी छात्र नहीं पढ़ रहा थाऐसी स्थिति में शिक्षकों को खाली बैठे रखने के बजाय वहां भेजना पूरी तरह सही है जहां छात्र उपलब्ध हैं, ताकि शैक्षणिक स्टाफ का सही उपयोग हो सके, किसी भी कर्मचारी को अपनी मनपसंद जगह या जिले में ही पदस्थापना का कोई निहित वैधानिक अधिकार नहीं है।

मुंगेली और जांजगीर-चांपा जिले के सरकारी स्कूलों से सबंधित इस मामले के अनुसार शकुंतला राठौर (58 वर्ष), शासकीय उमावि सिवनी (नवागढ़, जांजगीर-चांपा) में वाणिज्य व्याख्याता के पद पर कार्यरत थीं। कृष्णा देवी साहू (39 वर्ष), भी इसी स्कूल में वाणिज्य व्याख्याता के पद पर पदस्थ थी। राज्य सरकार की युक्तिकरण नीति के तहत 7 जून 2025 को दोनों को उनके मूल स्कूल में ‘अतिशेष’ घोषित कर दिया गया* राठौर का तबादला शासकीय उमावि दशरंगपुर (मुंगेली) और साहू का तबादला शासकीय उमावि कोना (मुंगेली) कर दिया गया थादोनों व्याख्याताओं ने अपनी याचिका में कहा, जांजगीर-चांपा जिले के ही अन्य स्कूलों में पद खाली होने के बावजूद काउंसलिंग में उन्हें नहीं दिखाया गया उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में एक स्वीकृत पद के विरुद्ध दो-दो कॉमर्स टीचर तैनात हैं* राज्य स्तरीय समिति और हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा राहत न मिलने पर उन्होंने डिवीजन बेंच में यह अपील दायर की थी*प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफदोनों व्याख्याताओं की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता सुनील कुमार सोनी ने कहा, अधिकारियों ने उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया। सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि बिना ठोस कारण बताए अभ्यावेदन को खारिज करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है* राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल प्रसून भादुड़ी ने कहा, युक्तिकरण नीति के नियम 7 (सी) (2) के तहत यदि किसी स्कूल में संबंधित विषय का एक भी छात्र नामांकित नहीं है, तो वहां के शिक्षकों को अतिशेष मानकर उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां बच्चे पढ़ रहे हैं। सिवनी स्कूल में कॉमर्स का एक भी छात्र नहीं था, इसलिए यह कदम उठाया गया।शैक्षणिक स्टाफ का सही उपयोगयाचिका की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुईडिवीजन बेंच ने सिंगल जज के फैसले को सही ठहराते हुए याचिकाकर्ताओं की दलीलें खारिज कर दींडिवीजन बेंच ने कहा, सिवनी स्कूल में कॉमर्स विषय का एक भी छात्र नहीं पढ़ रहा थाऐसी स्थिति में शिक्षकों को खाली बैठे रखने के बजाय वहां भेजना पूरी तरह सही है जहां छात्र उपलब्ध हैं, ताकि शैक्षणिक स्टाफ का सही उपयोग हो सके

kamlesh Sharma

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