हाईकोर्ट ने सिप्ला फार्मास्युटिकल कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द किया
०० जमा राशि लौटाने का निर्देश
०० कोविड-19 महामारी में रेमडेसिविर इंजेक्शन सप्लाई नहीं करने पर की गई थी कार्रवाई
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने जानी-मानी फार्मास्युटिकल कंपनी सिप्ला को कोविड 19 महामारी के दौरान मांग के अनुसार रेमडेसिविर दवा की अपूर्ति नहीं करने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने तथा प्रतिभूति राशि राजसात किए जाने के आदेश को रद्द करते हुए जमा राशि लौटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आदेश में कहा कि जहां कॉन्ट्रैक्ट का काम न करना खास हालात की वजह से होता है, वहां फ्रॉड या गलत काम न होने पर भी ब्लैकलिस्टिंग और सिक्योरिटी डिपॉज़िट ज़ब्त करना गलत और टिकाऊ नहीं है, क्योंकि ब्लैकलिस्टिंग का ऑर्डर फ़ेयरनेस टेस्ट पर खरा उतरना चाहिए।
मामला यह है कि कोविड 19 की दूसरी लहर के दौरान मौजूद असाधारण हालात में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने 100 एमजी स्ट्रेंथ वाले रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई के लिए 26.03.2021 को ई टेंडर जारी किया। इसमें सिप्ला फार्मास्युटिकल कंपनी ने भाग लिया। सफल बोलीदार होने पर कंपनी को सप्लाई आर्डर जारी किया गया। इसमें पहले ख्ोप में कंपनी ने मांग के अनुसार रेमडेसिविर की 5,000 वायल की सप्लाई के लिए जारी किया गया। इसके बाद, 08.04.2021 को 6,000 वायल की सप्लाई के लिए एक और परचेज़ ऑर्डर जारी किया गया। इसके तुरंत बाद, 09.04.2021 को, 35,000 वायल की सप्लाई के लिए एक और परचेज़ ऑर्डर जारी किया, और उसी दिन, 15,000 और वायल के लिए एक और परचेज़ ऑर्डर जारी किया। इस तरह, कुछ ही दिनों में, पिटीशनर को लगभग 61,000 वायल की कुल सप्लाई करनी थी, जिसमें एक ही दिन में ऑर्डर की गई 50,000 वायल शामिल थीं। डिमांड अचानक और इतनी ज़्यादा बढ़ोतरी टेंडर में बताई गई मात्रा से कहीं ज़्यादा थी और इसे तय समय में पूरा करना नामुमकिन था, खासकर मौजूदा हालात में कोविड 19 महामारी की दूसरी लहर के पीक के दौरान हुईं, जब पूरे देश में रेमडेसिविर की बहुत ज़्यादा माँग थी। इस दौरान, दवा बनाने वाली कंपनियाँ कच्चे माल की भारी कमी, सप्लाई चेन में रुकावट, ट्रांसपोर्टेशन में मुश्किलें, लॉकडाउन और कोविड इन्फ़ेक्शन की वजह से वर्कफोस की कमी और दूसरी ऑपरेशनल दिक्कतों का सामना कर रही थीं। पिटीशनर पर भारत सरकार के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रेमडेसिविर के डिस्ट्रीब्यूशन के बारे में जारी किए गए एलोकेशन डायरेक्टिव का पालन करने की भी ज़िम्मेदारी थी। एकाएक मांग बढ़ने पर सप्लाई नहीं कर पाने के संबंध में कंपनी ने स्वास्थ्य विभाग को अपना डिटेल में जवाब पेश किया। इसके बावजूद शासन ने कंपनी को मांग की अपूर्ति नहीं करने पर ब्लैकलिस्ट करने के साथ जमा प्रतिभूति राशि को भी राजसात किया। इसके खिलाफ कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कार्रवाई को चुनौती दी गई।
हाईकोर्ट ने सुनवाई उपरांत ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को रद्द करते हुए जमा राशि लौटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि तीन साल के लिए ब्लैकलिस्ट करने और सिक्योरिटी डिपॉज़िट ज़ब्त करने का कठोर नतीजा, जिसके कारण पिटीशनर को प्रोडक्ट से जुड़ी भविष्य की सरकारी खरीद प्रक्रियाओं से बाहर किया जाना गलत है। याचिकाकर्ता ने महामारी की दूसरी लहर के दौरान उठाई गई बहुत ज़्यादा मांग को पूरा करने में आने वाली प्रैक्टिकल मुश्किलों के बारे में बताया था। 05.05.2021, 14.09.2021 और 22.10.2021 की बातचीत में खास तौर पर कच्चे माल की कमी, सप्लाई चेन में रुकावट, मैन्युफैक्चरिग कैपेसिटी में कमी और भारत सरकार द्बारा जारी किए गए एलोकेशन ऑर्डर का ज़िक्र था, जिसमें पूरे देश में रेमडेसिविर बांटने की ज़रूरत थी।
