शासन ने शपथपत्र पेश कर कोलाहल एक्ट में बदलाव के लिए कमेटी गठित होने की जानकारी दी
बिलासपुर। प्रदेश भर में ध्वनि प्रदूषण को लेकर जनहित याचिका पर चल रही सुनवाई में आज शासन ने शपथपत्र पेश कर कोलाहल एक्ट में बदलाव के लिए कमेटी गठित होने की जानकारी दी। चीफ जस्टिस की डीबी ने अगली सुनवाई 3 अगस्त को नए शपथपत्र में विस्तृत जानकारी देकर मानसून सत्र में कानून बनाने का निर्देश दिया है। प्रदेश में होने वाले ध्वनी प्रदूषण को लेकर राजधानी रायपुर की नागरिक समिति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका लगाई थी। डीजे और साउंड बॉक्स के शोर से आम लोगों को होने वाली परेशानियों को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद हाईकोर्ट ने भी संज्ञान लेकर सुनवाई शुरू कर दी थी। पहले हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से इस ध्वनी प्रदूषण को अल्ट्रावायरेस घोषित करने की मांग की गई। सरकार की ओर से इस पर कहा गया कि मामले में लगातार कार्रवाई हो रही हैयाचिकाकर्ता ने कहा था कि, कोलाहल अधिनियम में इतने कड़े है ही नहीं एक या दो बार 500-1000 रुपए पेनाल्टी लगाकर छोड़ दिया जाता है, ना सामान की जब्ती होती है और ना ही कोई कड़े नियम बनाए गए है* मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने भी डीजे के साथ लेजर और बीम लाइट से होने वाली परेशानियों पर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि डीजे से हार्ट के साथ ऐसे लेजर लाइट से आम लोगों की आंखों को खतरा है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार को प्रयास करने चाहिए वहीं, दो हस्तक्षेप आवेदन दिए हैं, जिसमें आपात नंबर 112 पर सूचना दिए जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने की जानकारी दी गई।महाधिवक्ता ने इसे लेकर की गई कार्रवाई की जानकारी दी। सरकार की ओर से कहा गया कि, डीजे और अन्य वाहन माउंटेड साउंड सिस्टम में लेजर लाइट पर पहले से ही रोक है, उल्लंघन पर जुर्माना लग रहा है बार-बार उल्लंघन पर वाहन जब्त किए जा रहे हैं। पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम के तहत बने नियमों का उल्लंघन करने पर पांच साल की सजा या एक लाख रुपए का जुर्माना या दोनों लगाया जा सकता है, अगर नियमों का उल्लंघन जारी रहता है तो प्रतिदिन 5000 रुपए का फाइन और लगाया जा सकता है*आज शुक्रवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच में सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से एक शपथपत्र पेश किया गया। इसमें बताया गया कि कोलाहल नियंत्रण अधिनियम में बदलाव के लिए प्रदेश स्तरीय कमेटी बनाई गई है।यह कमेटी संबंधित विशेषज्ञों के साथ बैठक कर परिवर्तन के बिंदुओं को तय करेगी* चीफ जस्टिस ने कहा कि , मानसून सत्र आ रहा है , इसमें आप नया कानून बनवा लें, ताकि वह समय पर लागू हो सके। कोर्ट ने आगली सुनवाई 3 अगस्त को निर्धारित करते हुए एक नया शपथपत्र पेश करने को भी कहा है, जिसमें सारी बातें विस्तार से अवगत कराई जाएँगी।
