दाल मिल पर निराश्रित शुल्क लगाए जाने पर रोक
00 हाई कोर्ट ने शासन के अधिसूचना को कोर्ट के निर्णय से बाधित किया
बिलासपुर। रायपुर दाल मिल एसोसियेशन के मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने याचिका मंजूर कर ली है * इसके साथ ही अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राज्य शासन द्वारा जारी 26 साल का बकाया निराश्रित शुल्क एक साथ दिए जाने के आदेश को हाईकोर्ट के निर्णय से बाधित रखा है। राज्य शासन ने एक नोटिफिकेशन जारी कर बाहर से आने वाले अनाजों पर वर्ष 2000 से दशमलव शून्य दो ( 0.2)प्रतिशत निराश्रित शुल्क देने का निर्देश सभी दाल और अन्य अनाज से सबंधित मिलों, उद्योगों को दिया । यह निराश्रित शुल्क समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत गरीब वर्ग और असहाय लोगों के लिए होता है * छत्तीसगढ़ शासन ने अब तक बाहर से आने वाले अनाज , दलहन तिलहन पर छूट दे रखी थी अब 2026 में अचानक नोटिफिकेशन जारी कर दिया इसमें पिछले 26 साल का शुल्क एक साथ मंडी बोर्ड के पास जमा करने को कहा गया यह भी चेतावनी दी गई कि , अगर यह शुल्क जमा नहीं हुआ तो लायसेंस भी निरस्त कर दिया जाएगा। इस वजह से उद्योग संचालकों को स्व आंकलन करते हुए राशि जमा करने को कहा गया। रायपुर दाल मिल एसोसियेशन ने करीब 400 मिल संचालकों की ओर से एडवोकेट अमन सक्सेना के माध्यम से हाईकोर्ट की शरण ली चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की डीबी में सुनवाई हुई । सुनवाई के दौरान एसोसियेशन के अधिवक्ता ने बताया कि, छत्तीसगढ़ निराश्रित एवं निर्धन व्यक्तियों की सहायता अधिनियम 1970 के तहत यह स्पष्ट है,कि कृषि उपज मंडी अधिनियम के अंतर्गत मंडी फीस लिए जाते समय ही यह शुल्क लिया जा सकता है एक नवंबर 2000 से शासन ने दलहन , तिलहन और गेहूं पर इससे छूट दे रखी थी। इतने वर्षों बाद अचानक नया आदेश जारी करना विधिक और उचित नहीं हैं * सुनवाई के बाद कोर्ट ने अंतरिम राहत दे
ते हुए फिलहाल शुल्क वसूलने पर रोक लगाते हुए इस याचिका पर आने वाले निर्णय से इसे बाधित कर दिया है* राज्य शासन और मंडी बोर्ड समेत सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब भी माँगा गया है ।
