बिलासपुर। 15 साल पहले पास की गई परीक्षा को वर्षों बाद अवैध बताते हुए रविशंकर विवि ने एमए अंतिम वर्ष की परीक्षा देने से रोक दिया। इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विवि के आदेश को निरस्त कर 60 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को एलिजिबलटी सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है।ko
महासमुंद निवासी अस्मिता शर्मा ने वर्ष 2010 में बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीसीए डिप्लोमा में 2011 में प्रवेश लिया, इसे भी पास करने के बाद उन्होंने रमन विवि बिलासपुर से बीसीए की पढ़ाई शुरू कीदूरवर्ती शिक्षा माध्यम से इन्होने 2014 में इसे सफलता पूर्वक पूरा कर लिया इसके बाद अपना अकादमिक रिकार्ड बढाने के लिए रविशंकर विवि रायपुर में एम ए इंग्लिश विषय में प्रवेश लिया । 2016 में यह इसमें उतीर्ण हो गईं , मगर कुछ कम अंक आने के कारण याचिकाकर्ता ने दोबारा पीजी करने रमन विवि से प्रायवेट परीक्षा देकर 2018 में इसे उतीर्ण किया । इसके बाद प्रीबीएड परीक्षा भी बेहतर अंकों से पास कर रविशंकर विवि के अंतर्गत श्याम बालाजी कॉलेज में बी एड में प्रवेश लिया। दोनों सेमेस्टर पास करते हुए जब वह अंतिम वर्ष में पहुंची तो अचानक रविशंकर विवि ने उन्हें परीक्षा देने स यह कहकर रोक दिया कि , आपने जो डीसीए किया था वह वैध नहीं है , इसलिए पात्रता निरस्त कि जाती है और परीक्षा में शामिल नहीं किया जा सकता है। इस बात से परेशान याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में एडवोकेट प्रतीक शर्मा के माध्यम से याचिका पेश की । मामले में जस्टिस ए के प्रसाद कि सिंगल बेंच में सुनवाई हुई । सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने विवि के आदेश को निरस्त कर 60 दिन के भीतर याचिकाकर्ता को एलिजिबलटी सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया है
