अस्थाई या गेस्ट कर्मचारी सिर्फ लंबी सर्विस के आधार पर स्थाई होने का अधिकारी नहीं-हाईकोर्ट
००० एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के गेस्ट शिक्षकों के मामले में सरकार न्यायहित में विचार करे
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय के अस्थाई पोस्ट ग्रेजुएट टीचरर्स को नियमित करने की मांग को लेकर पेश याचिका में कहा कि याचिकाकर्ताओं की अस्थाई नियुक्ति किसी रेगुलर रिक्रूटमेंट प्रोसेस या किसी कानूनी रिक्रूटमेंट रूल्स के तहत नहीं की गई थी। यह अच्छी तरह से तय है कि अस्थाई या गेस्ट कर्मचारी को सिर्फ लंबी सर्विस के आधार पर स्थाई होने का अधिकार नहीं मिलता है। कोर्ट ने न्याय हित में एक संतुलित और न्यायसंगत निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी याचिकाकर्ता के मामलों पर फिर से विचार करें, जिन्होंने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय संस्थानों में काफी समय तक काम किया है, और उनके अनुभव को लागू भर्ती नियमों या पॉलिसी के तहत उचित वेटेज दिया जाए, फिर से नियुक्ति या एंगेजमेंट के लिए विचार किया जाएगा।
याचिकाकर्ता सरोज कुमार गुप्ता, अनूप तिर्की सहित अन्य की एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय में पोस्ट ग्रेजुवेट टीचर पीजीटी के पद में गेस्ट शिक्षक के रूप में 2016 से 2022 के बीच में हुआ है। समय पर उनकी नियुक्ति को निरंतर किया गया। याचिकार्ताओं में कई पिछले 6 वर्ष कुछ 4 वर्ष से संस्थान में शिक्षक के पद में कार्यरत है। याचिकाकर्ताओं के पास संबंधित विषय में पोस्ट ग्रेज्युवेट डिग्री एवं बीएड डिग्री है। भारत सरकार के ट्राइबल अफ़ेयर्स मिनिस्ट्री ने 13.11.2020 को ईएमआरएस इंस्टीट्यूशन के कामकाज और एडमिनिस्ट्रेशन को कंट्रोल करने के लिए पूरी गाइडलाइंस जारी की हैं गाइडलाइंस के 27 क्लॉज़ 9.1(के) के मुताबिक, अगर ज़रूरत पड़ी तो नेशनल एजुकेशन सोसाइटी फॉर ट्राइबल स्टूडेंट्स राज्यों के लिए टीचरों की भर्ती का काम किसी इंडिपेंडेंट एजेंसी को सौंप सकती है, जबकि क्लॉज़ 9.3(ई) और (एफ) खास तौर पर तय नियमों और रिज़र्वेशन पॉलिसी के हिसाब से टीचिग और नॉन-टीचिग स्टाफ की भर्ती की ज़िम्मेदारी राज्य सोसाइटी पर डालते हैं। विज्ञापन के अनुसार राष्ट्रीय स्तर पर आवेदन आमंत्रित किया गया है। इसमें पहले से कार्यरत पीजीटी शिक्षकों के संबंध में कोई उल्लेखनीय है। याचिकाकर्ताओं ने नियमित करने की मांग की थी।
याचिका में जस्टिस एके प्रसाद की कोर्ट की याचिका में सुनवाई हुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति अस्थाई एवं गेस्ट टीचर के रूप में हुई थी। किसी भर्ती नियम के तहत नियुक्ति नहीं होने के कारण स्थाई होने का उनका कोई अधिकार नहीं है, और न ही कोर्ट स्थाई करने का आदेश दे सकता है। न्यायहित में कोर्ट ने एक संतुलित और न्यायसंगत निर्देश जारी किया है। केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार भी पिटीशनर्स के मामलों पर फिर से विचार करें, जिन्होंने संस्थानों में काफी समय तक काम किया है, और उनके अनुभव को लागू भर्ती नियमों या पॉलिसी के तहत उचित वेटेज/प्रिफरेंस दिया जाए, जब उन्हें फिर से नियुक्ति या एंगेजमेंट के लिए विचार किया जाएगा, बशर्ते कि वे एलिजिबिलिटी की शर्तें पूरी करते हों।
