माओवादियों के सहयोगी गुरू जी की जमानत आवेदन खारिज
०० 17 नवंबर 2023 को मतदान दल पर विस्फोट करने का आरोप
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस बीडी गुरू की युगलपीठ ने गरियाबंद जिला में मतदान दल पर आईईडी ब्लॉस्ट करने वाले माओवादियों को रसद एवं अन्य समाग्री उपलब्ध कराने तथा माओवादी संगठन के जुड़े गुरू जी की जमानत आवेदन को खारिज करते हुए यह टिप्पणी कि है कि जब किसी अभियुक्त पर राज्य के विरुद्ध अपराधों के लिए विशेष क़ानूनों के तहत आरोप लगाए जाते हैं, तो आमतौर पर ज़मानत देने से मना किया जाता है। अदालतें आरोपों की गंभीरता, राज्य के हितों की सुरक्षा, और संबंधित विशेष क़ानूनों द्बारा निर्धारित ज़मानत पर वैधानिक सीमाओं को ध्यान में रखते हुए, असाधारण सावधानी और कठोर दृष्टिकोण अपनाने के लिए बाध्य हैं।
मामला संक्षेप में यह है कि 17 नवंबर 2023 को, लगभग 3:40 अपराह्न, मतदान समाप्त होने के बाद आई.टी.बी.पी. कांस्टेबल जोगेंद्र कुमार, सुरक्षा बल के साथ लौट रहे थे। जब वे बड़ेगोबरा के पास पहुँचे, तो जानबूझकर एक बम विस्फोट किया गया, जिसका उद्देश्य उनकी हत्या करना था। उक्त बम विस्फोट के परिणामस्वरूप, कांस्टेबल जोगेंद्र कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उक्त घटना और शिकायत के आधार पर पुलिस स्टेशन मैनपुर जिला गरियाबंद ने अपीलकर्ता धनेश राम ध्रुव ऊर्फ गुरू जी सहित अन्य अभियुक्तों के विरुद्ध उपरोक्त अपराधों के लिए एक आपराधिक मामला दर्ज किया। वारदात में शामिल माओवादी एवं उनके सहयोगियों के विरूद्ब धारा 147, 148, 149, 302, 307, 120-बी, 121, 121-ए, और गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम, 1960 की धारा 16, 17, 18, 20, 23, 38, 39, 40 के तहत प्रकरण पंजीबद्ब किया गया है। जेल में बंद आरोपित गुरू जी की विश्ोष न्यायालय से जमानत खारिज होने पर हाईकोर्ट में याचिका पेश की गई। आरोपी की याचिका में कहा गया कि अपीलकर्ता निर्दोष है। वह
प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत है और उसका कथित अपराधों से कोई संबंध नहीं है। उसे केवल संदेह के आधार पर, वर्तमान अपराध में झूठा फंसाया गया है, बिना किसी ठोस या विश्वसनीय सबूत के जो उसे संबंधित घटना से जोड़ता हो। वह यह दलील देगा कि अपीलकर्ता के पास से कोई भी
अपराधी सामग्री बरामद नहीं हुई है। कोविड-19 से संबंधित सामग्री, यानी एक साहित्य (पुस्तिका) और एक कागज़ (पैम्फलेट) अपीलकर्ता के घर से बरामद किया गया है। आगे दलील दी कि घटना के एक साल बाद, पुलिस ने याचिकाकर्ता को वर्तमान मामले में गिरफ्तार कर लिया।
एनआईए के अधिवक्ता ने जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए कहा कि अपीलकर्ता के खिलाफ जाँच के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्य उसकी सक्रिय भागीदारी और संलिप्तता को दर्शाते हैं। आगे दलील दी है कि वर्तमान मामला एक जघन्य और गंभीर आतंकवादी कृत्य, अर्थात आईईडी विस्फोट
से उत्पन्न हुआ है, जो प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) के सदस्यों द्बारा 17.11.2023 को चुनाव ड्यूटी से लौट रहे सुरक्षाकर्मियों और मतदान कर्मचारियों को निशाना बनाकर किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप आईटीबीपी के एक कांस्टेबल की मृत्यु हो गई थी। यह दलील दी गई है कि अपीलकर्ता ने उक्त आतंकवादी समूह के लिए रसद, सामग्री और सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जांच के दौरान, यह स्थापित हुआ है कि धनेश राम ध्रुव उर्फ गुरु जी आरोपी माओवादी गणेश उईकी, रामदास और सत्यम गावड़े से जुड़ा है। अपीलकर्ता ने प्रतिबंधित संगठन सीपीआई(माओवादी) के कार्यकर्ताओं के साथ षड्यंत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया था। आठ गवाहों के बयान सीआरपीसी की धारा 164 के तहत दर्ज किए गए, जिसमें उन्होंने अपीलकर्ता की सीपीआई माओवादियों के साथ संलिप्तता के बारे में बताया है और यह भी गवाही दी है कि अपीलकर्ता ने बैठक में भाग लिया था और सीपीआई (माओवादी) के कार्यकर्ताओं को रसद और वित्तीय सहायता प्रदान की थी। सभी पक्षों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस की डीबी ने जमानत आवेदन को खारिज किया है।