हाईकोर्ट ने कहा शिक्षक का पद विश्वास और ज़िम्मेदारी का होता है
०० मासूम छत्राओं से बदनीयत रखने वाले शिक्षक की अपील खारिज
बिलासपुर। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के साथ बेडटच के आरोपी शिक्षक द्बारा सजा के प्रभाव व प्रवर्तन पर रोक लगाने की मांग को लेकर पेश अपील में कहा कि एक शिक्षक का पद विश्वास और ज़िम्मेदारी का होता है। किसी नाबालिग छात्र के साथ कोई भी यौन,अपमानजनक या शोषणकारी कृत्य न केवल व्यावसायिक कदाचार है, बल्कि पाक्सो अधिनियम के तहत दंडनीय एक गंभीर आपराधिक अपराध है, क्योंकि यह बाल शोषण के समान है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। इसके साथ कोर्ट ने शिक्षक की अपील को खारिज किया है।
बरेला मुंगेली निवासी अपीलकर्ता कीर्ति कुमार शर्मा शासकीय स्कूल में शिक्षक के पद में पदस्थ हैं। उनकी नियुक्ति गणित एवं अंग्रेजी पढ़ाने के लिए हुई थी। इसके बावजूद वे बिना अधिकारिता के 7 वीं कक्षा में घुस कर विज्ञान पढ़ाते थ्ो। पढ़ाने के दौरान वे छात्राओं के साथ बेडटच कर अभद्र टिप्पणी किया करता था। छात्राओं के सामने तम्बाखू, गुड़ाखू का उपयोग करता था। शिक्षक के इस हरकत की जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की गई। शिकायत पर ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जांच करने का आदेश दिया गया। 28/03/2019 को सुश्री प्रतिमा मंडलोई, खंड शिक्षा अधिकारी विद्यालय पहुंचकर जांच प्रारंभ की। शिक्षकों और छात्रों की उपस्थिति में जांच की। जांच के दौरान, शिक्षकों और छात्रों के बयान लिखित रूप में दर्ज किए गए। जांच में पाया गया कि कीर्ति कुमार शर्मा गणित और अंग्रेजी पढ़ाने के लिए नियुक्त थे, फिर भी वे अक्सर बिना अधिकार के कक्षा 7 में प्रवेश करते थे और विज्ञान पढ़ाते थे। विज्ञान की कक्षाओं के दौरान, वे छात्राओं के शरीर के विभिन्न अंगों को छूते थे, जिनमें उनकी रीढ़ और छाती भी शामिल थी। वे गुटखा और गुड़ाखू भी खाते थे। छात्राओं के सामने खुलेआम तंबाकू का सेवन किया। इसके अलावा, जब छात्राएँ शौचालय गईं, तो उसने उनके प्रति अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जांच रिपोर्ट जिला शिक्षा अधिकारी, मुंगेली को भेजी और उसके बाद पुलिस स्टेशन जरहागाँव में रिपोर्ट दर्ज कराई। 2 मार्च 2022 को विश्ोष न्यायाधीश एफटीसी ने शिक्षक को 2 वर्ष 2 माह 6 दिन कैद एवं 2500 रूपेय दो बार अर्थदंड की सजा सुनाई है।
शिक्षक ने सजा के खिलाफ अपील प्रस्तुत कर अंतरिम राहत प्रदान करने एवं दोषसिद्बि निर्णय के प्रभाव और प्रर्वतन पर रोक लगाने की मांग की थी। अपील पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकलपीठ में सुनवाई हुुई। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक शिक्षक का पद विश्वास और ज़िम्मेदारी का होता है। किसी नाबालिग छात्र के साथ कोई भी यौन,अपमानजनक या शोषणकारी कृत्य न केवल व्यावसायिक कदाचार है, बल्कि पाक्सो अधिनियम के तहत दंडनीय एक गंभीर आपराधिक अपराध है, क्योंकि यह बाल शोषण के समान है और इसके लिए कड़ी सजा का प्रावधान है। अपीलकर्ता,
जो शिक्षक था और उत्पीड़न किया गया था,। पीड़िताओं की गवाही का एक अन्य नाबालिग छात्रा द्बारा पुष्ट की गई है, जिसने यह भी कहा कि उसकी सहेलियों का यौन उत्पीड़न
अपीलकर्ता द्बारा किया गया था। उनकी गवाही को खारिज करने का कोई ठोस कारण नहीं है। इसके साथ कोर्ट ने विश्ोष न्यायाधीश के आदेश को यथावत रखते हुए अपील खारिज किया है।
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सजा के बाद भी आरोपित सेवा में
इस पूरे मामले में आरोपित शिक्षक को प्रकरण के विचारण के दौरान निलंबित किया गया था। सजा होने के तीन वर्ष बाद भी वह सेवा में है।