तलाक के बाद शैक्षणिक दस्तावेजों में मूल नाम बहाल करना अब आसान
00 हाईकोर्ट ने बिलासा कन्या कॉलेज का प्रस्ताव किया निरस्त
000 हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने कहा कि परिणाम
घोषित होने के बाद नाम बदलने का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने के आधार पर शैक्षणिक दस्तावेजों में सुधार से इनकार नहीं किया जा सकता। बिलासपुर के शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय को सत्यापन और जरूरी औपचारिकताओं के बाद नाम सुधारने का निर्देश दिया गया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिलासपुर की छात्रा के शैक्षणिक दस्तावेजों में उनका मूल नाम बहाल करने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने शासकीय बिलासा कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय की शासी निकाय के छह मार्च 2023 के उस प्रस्ताव को निरस्त कर दिया, जिसमें नाम सुधारने की मांग खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने कॉलेज को निर्देश दिया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जिज्ञासा यादव मामले में निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार याचिकाकर्ता के शैक्षणिक रिकॉर्ड में सुधार की प्रक्रिया पूरी की जाए।
याचिकाकर्ता छात्रा ने वर्ष 2009 में हाईस्कूल और 2011 में हायर सेकेंडरी की परीक्षा अपने मूल नाम से उत्तीर्ण की थी। वर्ष 2012 में राजिक अहमद अंसारी से विवाह के बाद वह सुहाना अंसारी के नाम से जानी जाने लगीं। उन्होंने बिलासा कन्या महाविद्यालय से वर्ष 2013-16 में बीएससी होम साइंस, 2016-17 में एमएससी होम साइंस (मानव विकास) तथा 2018-19 में मार्गदर्शन एवं परामर्श में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पूरा किया। इन पाठ्यक्रमों के दस्तावेज अलग-अलग नामों से जारी हुए। बाद में पारिवारिक न्यायालय, बिलासपुर ने 24 फरवरी 2022 को विवाह निरस्त घोषित कर दिया। इसके बाद उन्होंने आधार, जाति प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और अन्य सरकारी दस्तावेजों में अपना मूल नाम सुरभि यादव, पिता शिव शंकर यादव, माता सुलेखा यादव के रूप में बहाल करा लिया।
शैक्षणिक दस्तावेजों में नाम अलग होने के कारण उन्हें सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करने में परेशानी हुई और कुछ मामलों में उनकी उम्मीदवारी भी प्रभावित हुई। उन्होंने कॉलेज और विश्वविद्यालय से दस्तावेजों में सुधार की मांग की। पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर होने पर तीन नवंबर 2022 को विस्तृत अभ्यावेदन देने और उस पर नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद कॉलेज की शासी निकाय ने नाम सुधारने की मांग अस्वीकार कर दी, जिसे सुरभि यादव ने दोबारा चुनौती दी। उनकी ओर से अधिवक्ता अविनाश के. मिश्रा ने पक्ष रखा।
रिकॉर्ड की जवाबदारी संस्था की
हाईकोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनाए रखना संस्थान की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ ही वास्तविक दस्तावेजों और बाद की कानूनी घटनाओं के आधार पर गलत या पुरानी पहचान को सुधारने की व्यवस्था भी होनी चाहिए। केवल इस आधार पर नाम सुधारने से इनकार नहीं किया जा सकता कि परिणाम घोषित होने के बाद बदलाव का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुधार से याचिकाकर्ता की पढ़ाई, प्रवेश वर्ष, अंक, श्रेणी या योग्यता में कोई बदलाव नहीं होगा। कॉलेज यह रिकॉर्ड सुरक्षित रख सकेगा कि उन्होंने उस समय सुहाना अंसारी के नाम से पढ़ाई की थी।
औपचारिकताएं पूरी कराएं
कोर्ट ने कॉलेज को निर्देश दिया कि मूल दस्तावेजों और पहचान का सत्यापन करने के बाद सुरभि यादव के नाम से संशोधित शैक्षणिक दस्तावेज जारी किए जाएं। इसके लिए आवश्यक शपथपत्र, निर्धारित शुल्क, राजपत्र प्रकाशन या अन्य उचित औपचारिकताएं पूरी कराई जा सकती हैं। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय को भी जरूरत पड़ने पर संबंधित अभिलेखों में सुधार के लिए सहयोग करना होगा। यह प्रक्रिया आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के छह सप्ताह के भीतर पूरी करने का प्रयास करने को कहा गया है। हालांकि, कॉलेज की मान्यता पर पुनर्विचार, अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मुआवजे की मांग पर कोर्ट ने कोई निर्देश नहीं दिया।
