दस्तावेजी साक्ष्य आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं
० करंट से बच्ची की मौत के मामले में आरोपी बरी
0 हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि रद्द की
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बिजली के तार से नाले में करंट फैलने के कारण सात वर्षीय बच्ची की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए परसराम बैगा को बरी कर दिया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल नहीं रहा कि खेत तक अवैध बिजली कनेक्शन आरोपी ने ही लिया था। अदालत ने विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम), कबीरधाम द्वारा 9 अक्टूबर 2024 को सुनाई गई सजा का आदेश निरस्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार, 30 अगस्त 2020 को सूचक तीरथराम ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसके चाचा बैशाखू की सात वर्षीय बेटी नेहा अपनी सहेलियों के साथ पनिहारी नाले में नहाने गई थी। आरोप था कि कृषि कार्य के लिए बिजली के खंभे से मोटर पंप तक खींचा गया तार टूटकर नाले में गिर गया था। इससे पानी में करंट फैल गया और उसकी चपेट में आने से बच्ची की मौत हो गई। पुलिस ने परसराम बैगा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304-क के तहत मामला दर्ज किया। जांच में एल्युमिनियम के तार के दो बंडल और एक मोनोब्लॉक मोटर पंप जब्त किए गए। बिजली वितरण कंपनी तथा विद्युत सुरक्षा अधिकारियों की रिपोर्ट भी प्राप्त की गई।
जांच के बाद आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 304-क और विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135(1)(क) के तहत आरोप पत्र पेश किया गया। विशेष न्यायालय ने 9 अक्टूबर 2024 को दोनों धाराओं में दोषी ठहराते हुए छह-छह महीने के कठोर कारावास और प्रत्येक अपराध के लिए 300 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। जुर्माना नहीं चुकाने पर 15-15 दिन के अतिरिक्त कठोर कारावास का प्रावधान किया गया था। दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया गया था। इस फैसले को परसराम बैगा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए पाया कि, बिजली कंपनी के उप अभियंता टिकेन्द्र कुमार देशमुख ने घटना के करीब साढ़े तीन महीने बाद 10 दिसंबर 2020 को घटनास्थल का निरीक्षण किया था और 22 मार्च 2021 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। जिरह में उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने संबंधित कृषि भूमि के स्वामित्व की जांच नहीं की थी। पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर ही भू स्वामी को आरोपी का बताया गया था। अदालत ने माना कि, देर से किए गए निरीक्षण और भूमि के स्वामित्व की पुष्टि नहीं होने के कारण उनकी रिपोर्ट के आधार पर यह विश्वसनीय रूप से साबित नहीं होता कि संबंधित खेत आरोपी का था और बिजली का अवैध कनेक्शन उसी ने लिया था।
एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन के मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य आरोपी के विरुद्ध आरोपों को संदेह से परे साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। इसके साथ ही अपील स्वीकार करते हुए दोषसिद्धि और सजा का आदेश निरस्त कर परसराम बैगा को दोनों आरोपों से बरी कर दिया गया। अदालत ने निर्देश दिया कि किसी अन्य मामले में हिरासत आवश्यक नहीं होने पर उसे तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 481 के तहत उसे संबंधित न्यायालय में 25 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया, जो छह महीने तक प्रभावी रहेगा।

kamlesh Sharma

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