नाबालिग को छेड़ने और आत्महत्या के लिए मजबूर करने के मामले में आरोपी की सजा बरकरार
00 हाईकोर्ट ने अपील खारिज कर 30 दिन के भीतर सरेंडर करने का दिया निर्देश
बिलासपुर। महासमुंद जिले में करीब 13 वर्षीय किशोरी को लगातार परेशान करने और उसके आत्महत्या करने के मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी ख़िरसाय पिता परसराम रात्रे की अपील खारिज कर दी है। जस्टिस सुधीर कुमार की सिंगल बेंच ने सेशन कोर्ट महासमुंद द्वारा भारतीय दंड संहिता की धारा 354 के तहत सुनाई गई दो साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा को बरकरार रखा है। जुर्माना नहीं चुकाने पर छह महीने के अतिरिक्त सश्रम कारावास का प्रावधान भी यथावत रखा गया है।
मामले के अनुसार, 7 जुलाई 2011 को ग्राम सोनामुंडी, थाना बसना, जिला महासमुंद में आरोपी ने किशोरी को बोरिंग के पास परेशान किया और उसके साथ गलत व्यवहार किया। आरोपी की हरकतों को लेकर पहले गांव में बैठक भी बुलाई गई थी और उसे समझाइश दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद वह किशोरी को लगातार परेशान करता रहा। घटना के दिन किशोरी घर लौटने के बाद अपने ऊपर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली। उसे जलता देखकर बच्चों ने शोर मचाया। ग्रामीणों ने आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन किशोरी की मौत हो गई।
किशोरी के पिता ने ग्रामीणों के साथ थाने पहुंचकर घटना की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मर्ग कायम कर प्राथमिकी दर्ज की और जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र पेश किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण जलने से उत्पन्न सदमा बताया गया तथा मृत्यु को आत्महत्या की प्रकृति का माना गया। मामले की सुनवाई के बाद सेशन कोर्ट महासमुंद ने 31 दिसंबर 2011 को आरोपी को धारा 354 के तहत दोषी ठहराते हुए दो साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसी फैसले को आरोपी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। प्रत्यक्षदर्शी सिरमोती ने बताया कि घटना के दिन आरोपी ने बोरिंग के पास किशोरी को पकड़ लिया था। उसे देखकर आरोपी खेतों की ओर भाग गया। किशोरी की मां करीमोती ने भी स्वीकार किया कि आरोपी पहले से उसकी बेटी को परेशान करता था और इस संबंध में गांव में बैठक हुई थी। एक अन्य गवाह के अनुसार, किशोरी ने मृत्यु से पहले उसे बताया था कि आरोपी द्वारा परेशान किए जाने के कारण उसने खुद को आग लगा ली।
अदालत ने पाया कि आरोपी पहले से विवाहित था और उसके बच्चे भी थे। इसके बावजूद वह किशोरी को लगातार परेशान कर रहा था। किशोरी की शादी तय होने के बाद आरोपी द्वारा उससे शादी करने की बात कहने का तथ्य भी साक्ष्यों में सामने आया। गांव में समझाइश दिए जाने के बाद भी आरोपी की हरकतें जारी रहने और घटना के दिन भी किशोरी को परेशान किए जाने की बात को अदालत ने महत्वपूर्ण माना। हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि निचली अदालत का दोषसिद्धि और सजा का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों के अनुरूप है तथा उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
जस्टिस सुधीर कुमार ने 15 अक्टूबर 2026 को सुनाए फैसले में अपील निरस्त करते हुए आरोपी के जमानत बांड रद्द कर दिए। अदालत ने आरोपी खीरसाय रात्रे, निवासी ग्राम सोनामुंडी, जिला महासमुंद को 30 दिनों के भीतर संबंधित ट्रायल कोर्ट के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है, ताकि वह शेष सजा काट सके। निर्धारित अवधि में आत्मसमर्पण नहीं करने पर ट्रायल कोर्ट को उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं। राज्य की ओर से पैनल अधिवक्ता डॉ. ऋचा पांडे ने पैरवी की।

kamlesh Sharma

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed