सशस्त्र बल आरक्षक भर्ती प्रक्रिया मामले में राज्य शासन की याचिका खारिज
० 90 दिन में दस्तावेज सत्यापन के साथ पूरी करनी होगी पदस्थापना
० सुप्रीम कोर्ट का आदेश 
बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में आरक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले से वेटिग लिस्ट (प्रतीक्षा सूची) में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजीव सचदेवा की खंडपीठ में हुई। पीठ ने छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि वेटिग लिस्ट में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को तीन महीने के भीतर जॉइनिग की प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति पत्र दिए जाएं। सीएएफ कांस्टेबल भर्ती प्रक्रिया के तहत परीक्षा और चयन प्रक्रिया के बाद एक बड़ी संख्या में पदों पर अभ्यर्थी वेटिग लिस्ट में थे। नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने कानूनी रास्ता अपनाया था। जब मामला शीर्ष अदालत के पाले में गया, तो राज्य सरकार ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता परसराम ध्रुव व अन्य की ओर से सीनियर एडवोकेट नौशिना आफरीन अली, एडवोकेट ऑन रिकार्ड अभीजीत श्रीवास्तव और अंशुमन श्रीवास्तव ने पैरवी की।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्कों को स्वीकार नही किया और यह याचिका खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने अभ्यर्थियों के हक में फैसला सुनाया। इस आदेश आने के बाद अब राज्य के गृह और पुलिस विभाग पर तय समय-सीमा के भीतर भर्ती प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी आ गई है। इस आदेश के अनुसार, अगले 90 दिनों के भीतर दस्तावेज़ सत्यापन और प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए अभ्यर्थियों को पदस्थ करना होगा।
