सहमति से रिलेशपशिप में रही व 6 वर्ष बाद दैहिक शोषण की रिपोर्ट
00 हाई कोर्ट ने न्यायालयीन कार्रवाई पर रोक लगाई
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने सहमति से रिलेशपशिप में रहने व 6 वर्ष बाद शादी से मना करने पर दुष्कर्म का एफआईआर दर्ज कराने एवं न्यायालय द्बारा मामले को संज्ञान में लिए जाने को रद्द करने पेश याचिका में सुनवाई उपरांत न्यायालय की सुनवाई एवं सभी आपराधिक कार्रवाई पर रोक लगाते हुए शासन व पीड़िता को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
याचिकाकर्ता सुरेश कुमार साहू पिता संतोष कुमार साहू उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम ससहा पामगढ़ सरकंडा में किराये के मकान में रहकर बैंक में नौकरी करता है। 2020 में उसकी सारंगढ़ क्ष्ोत्र में रहने वाली युवती से इस्टाग्राम में दोस्ती हुई। युवती सारंगढ़ से मिलने युवक के पास सरकंडा आती रही। दोनों आपसी सहमति से रिलेशनशिप में रहने लगे। इसके बाद युवती ने 2 अप्रैल 2026 को सरकंडा थाना में युवक के खिलाफ शादी का झांसा देकर दैहिक शोषण करने का रिपोर्ट दर्ज कराई। रिपोर्ट पर सरकंडा पुलिस ने युवक के खिलाफ जुर्म दर्ज कर बिलासपुर न्यायालय में चालान पेश किया। न्यायालय ने मामले को संज्ञेय अपराध मानते हुए संज्ञान में लिया एवं आगे की कार्रवाई प्रारंभ किया। इसके खिलाफ युवक ने अधिवक्ता रितेश शर्मा के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका पेश की। याचिका में कहा गया शिकायत करने वाली और याचिकाकर्ता बालिग थे, जो साल 2०2० से एक-दूसरे को जानते थे और कई सालों तक रिलेशनशिप में रहे। शिकायत 15.08.2020 की कथित घटना के लगभग छह साल बाद, 25.02.2026 को ही दर्ज की गई थी। आरोपों से सहमति से बने रिश्ते का पता चलता है और ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे पता चले कि पिटीशनर ने शिकायत करने वाले को धोखा देने के इरादे से शुरू से ही शादी का झूठा वादा किया था। सिर्फ़ रिश्ता खत्म होना या बाद में शादी से इनकार करना अपने आप में सेक्शन 69 बीएनएस के तहत क्रिमिनल लायबिलिटी नहीं ला सकता। जांच एजेंसी ने बिना सोचे-समझे एफआईआर दर्ज कर ली, 11.03.2026 को चार्जशीट फाइल कर दी, और ट्रायल कोर्ट ने 02.04.2026 को कथित अपराध के ज़रूरी पहलुओं को समझे बिना ही संज्ञान ले लिया। न्याय के हित में एफआईआर के नतीजे में मिली चार्जशीट, 02.04.2026 का कॉग्निजेंस ऑर्डर, और उससे होने वाली सभी आगे की कार्रवाई को रद्द करने की मांग की गई। शासन ने याचिका का विरोध किया।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी ने सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए उत्तरवादियों को साधारण और स्पीड पोस्ट से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। शासन की ओर से नोटिस स्वीकार किए जाने पर कोर्ट ने शिकायतकर्ता को भी नोटिस जारी कर हलफनामा में जवाब फाईल करने एवं इसके बाद याचिकाकर्ता को प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने समय दिया है। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अगली लिस्टिंग की तारीख तक, प्रकरण की आगे की कार्रवाई, जो एडिशनल सेशंस जज, बिलासपुर में चल रही उस पर रोक लगाई है।
