लगातार प्रताड़ना के शिकार हुए थे मासूम
00 बंद लिफ़ाफ़े में काउंसिलिंग रिपोर्ट पेश
बिलासपुर। दो नाबालिग बच्चों को लेकर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर चल रही सुनवाई में आज गुरूवार को हाईकोर्ट में बच्चों की काउंसिलिंग रिपोर्ट पेश कर दी गई। ज्युडिशियल एकेडमी की डायरेक्टर और सीनियर एडवोकेट नौशिना अली ने बंद लिफ़ाफ़े में रिपोर्ट दी है। कोर्ट ने इस मामले को अभी लंबित रखा है। इससे पहले बैकुंठपुर में 12 साल की बच्ची को बंधक बनाकर जीजा ने उसके साथ रेप किया था। मामले में पुलिस ने आरोपी जीजा को गिरफ्तार कर लिया इस बीच, नाबालिग की मुंहबोली बहन ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दावा किया था कि उसकी बहन और 9 साल के भाई को अवैध रूप से चाइल्ड हेल्पलाइन में रखा गया है जबकि रिकॉर्ड के अनुसार लड़का बैकुंठपुर चाइल्ड वेलफेयर सेंटर और लड़की अंबिकापुर बालिका गृह में सुरक्षित थे। मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मुख्य सचिव और डीजीपी को दोनों बच्चों को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माना कि, याचिकाकर्ता बहन ने तथ्यों को लेकर कोर्ट को गुमराह किया है, जिसके बाद अदालत ने ज्युडिशियल एकेडमी की डायरेक्टर और सीनियर एडवोकेट नौशिना अली से उसी शाम बच्चों की काउंसिलिंग करते हुए इसकी रिपोर्ट बंद लिफाफे में मांगी थी। आज काउंसिलिंग रिपोर्ट बंद लिफ़ाफ़े में रखकर हाईकोर्ट में पेश कर दी गई। डिवीजन बेंच ने इस मुक़दमे को फिलहाल लंबित ही रखते हुए डिस्पोज ऑफ नहीं किया है ।लगातार हुई प्रताड़ना
दरअसल, बैकुंठपुर के दो अनाथ बच्चे 12 साल की बच्ची और उसका 9 साल का भाई अपनी मुंहबोली दीदी के घर रह रहे थे। आरोप है कि इस दौरान दोनों के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की गई लगातार हो रही प्रताड़ना से परेशान होकर दोनों भाई-बहन दीदी और जीजा के घर से भागकर अपने एक परिचित के यहां पहुंच गए मामले की जानकारी मिलने पर पुलिस और चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को सूचना दी गई इसके बाद दोनों बच्चों की काउंसिलिंग कराई गई और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उन्हें संरक्षण में रखा गया था।
