13 वर्षीय छात्रा से छेड़छाड़ करने वाले ऑटो चालक को तीन वर्ष कैद की सजा पूरा करना होगा
00 हाई कोर्ट ने अपील खारिज की
00 पीड़िता को स्कूल छोड़ने व घर लाने का काम करता था आरोपी
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के आरोपी ऑटो चालक की अपील को खारिज करते हुए विश्ोष न्यायाधीश द्बारा सुनाई गई सजा की पुष्टि की है। विश्ोष न्यायाधीश ने आरोपी को 3 वर्ष कैद एवं 2000 रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपी का जमानत निरस्त कर विश्ोष न्यायाधीश के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है।
आरोपी मोहम्मद इकराम पिता मोहम्मद इस्माइल 25 वर्ष ऑटो चालक है। वह स्कूली बच्चों को स्कूल छोड़ने का काम करता था। पीड़िता के नाबालिग भाई ने 5-2-2020 को पुलिस थाना तरबहार में एक लिखित शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि, उसकी नाबालिग बहन (पीड़ित की उम्र लगभग 13 साल) को उसकी सहेली ने आरोपी से मिलवाया था, आरोपी नाबालिग पीड़िता को अपनी ऑटो रिक्शा में घुमाने ले गया था। शिकायत करने की तारीख पर, नाबालिग पीड़िता ने अपने परिवार वालों को बताया कि, घूमने के दौरान आरोपी उसे हनुमान मंदिर गार्डन ले गया और उसके साथ बार-बार छेड़छाड़ की और उसके विरोध करने के बावजूद वह नहीं रुका। तारबाहर पुलिस ने जांच उपरांत आरोपी ऑटो चालक के खिलाफ आईपीसी की धारा 354 एवं यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम 2012 (पाक्सो एक्ट) की धारा 8 के तहत अपराध पंजीबद्ब कर न्यायालय में चालान पेश किया। विश्ोष न्यायाधीश एफटीसी ने आरोपी को 2022 में आईपीसी की धारा 354 में 3 वर्ष कठोर कारावास, 1000 अर्थदंड एवं पाक्सो एक्ट की धारा 7/8 में 3 वर्ष कैद 1000 रू अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड नहीं देने पर आरोपी को 6 माह का अतिरिक्त कारावास भुगताने का आदेश दिया। विश्ोष न्यायाधीश ने सभी सजा को एक साथ चलाने का निर्देश दिया।
सजा के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील पेश की। अपील में कहा गया कि उसे झुठे मामले में फंसाया गया है। पीड़िता के माता-पिता पिछले 5-6 माह का पैसा नहीं दिया है। पैसा मांगने के कारण उसे फंसाया गया है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई उपरांत अपने आदेश में कहा कि पीड़िता ने जो कथन की उसकी पुष्टि उसके भाई, पिता, मां ने भी किया है। प्रतिपरिक्षण में बयानों में कोई अंतर नहीं मिला है। सभी के बयान भरोसा लायक है। आरोपी ने पीड़िता की इज्ज़त खराब करने के इरादे से उसे गलत तरीके से छूकर उस पर ज़बरदस्ती कर उसका यौन उत्पीड़न किया। आरोपी पीड़ित को स्कूल ले जाता था। आरोपी का कथन कि ऑटो रिक्शा का किराया नहीं दिया, इसलिए उसे झूठा फंसाया गया है, भरोसेमंद नहीं है। इसके साथ कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए विश्ोष न्यायालय के आदेश को यथावत रखते हुए जमानत को निरस्त कर सरेंडर करने का आदेश दिया है।
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बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों के सुरक्षित स्कूल पहुंचाने व लाने का वाहन चालकों पर पूरा भरोसा करते हैं, कि वह उनके बच्चों को सुरक्षित घर से ले जाने व लाने का काम करेंगे। इसके एवज में वे नियमित रूप से किराया भुगतान करते हैं। ऑटो चालक ने बच्चों को सुरक्षा देने के बजाय खुद ही उसकी इज्जत लेने का प्रयास किया था।
