परिवार न्यायालय भावनात्मक आघात को कम करने में सहायता करते हैं-चीफ जस्टिस सिन्हा

बिलासपुर। “परिवार न्यायालय केवल विवादों के निराकरण तक सीमित नहीं हैं, वे संबंधों की रक्षा कर, पुनर्मिलन को प्रोत्साहित करते हैं और भावनात्मक आघात को कम करने में सहायता करते हैं।” उक्त बातें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने

परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशों, काउंसलर्स के राज्य स्तरीय बैठक को सम्बोधित करते हुए कहा।

न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ द्वारा 07-12-2025 को विवेकानंद सभागार में परिवार न्यायालयों के न्यायाधीशों, काउंसलर्स, सामाजिक कल्याण एजेंसियों एवं परिवार न्यायालय से संबंधित अन्य अधिकारियों की राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस बैठक में परिवार से जुड़े विवादों के न्यायिक प्रशासन में योगदान देने वाले प्रमुख हितधारक एक मंच पर एकत्र हुए। मुख्य न्यायाधीश ने वर्चुअल माध्यम से राज्य स्तरीय बैठक का उद्घाटन किया।

उन्होंने अपने संबोधन में समाज की सबसे संवेदनशील और बुनियादी इकाई- परिवार की रक्षा में परिवार न्यायालयों की अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि परिवार न्यायालयों में कार्य करते समय विधिक ज्ञान के साथ-साथ सहानुभूति, धैर्य एवं मानवीय व्यवहार की समझ आवश्यक है, जिससे न्यायाधीशों, काउंसलर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं समर्थन एजेंसियों का एक संवेदनशील और सहायक तंत्र निर्मित होता है।

मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि इस बैठक का उद्देश्य केवल चुनौतियों की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि परिवार न्यायालय से सहायता मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, एवं समयबद्ध न्याय मिले। उन्होंने कहा कि मामलों का निराकरण जितनी संवेदनशीलता से किया जाता है, वही यह निर्धारित करता है कि परिवार मजबूत होकर उभरेगा या और अधिक विखंडित होगा।

उन्होंने काउंसलर्स एवं सामाजिक कल्याण एजेंसियों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके हस्तक्षेप ने कई जटिल परिस्थितियों में परिवार संबंधों में पुनः सामंजस्य स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका सहयोग परिवार न्यायालयों के समग्र एवं संतुलित न्यायिक निर्णयों में अत्यंत आवश्यक है।

अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश ने लंबित प्रकरणों, अधोसंरचनागत कमी, विशेषज्ञ प्रशिक्षण की आवश्यकता तथा घरेलू हिंसा, बाल अभिरक्षा, भरण-पोषण, गोद लेने एवं संरक्षकता जैसे बढ़ते और जटिल होते मामलों पर चिंतन करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय एवं निरंतर कौशल-वृद्धि की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आह्वान किया कि प्रत्येक परिवार न्यायालय को ऐसा मंच बनाया जाए जहाँ विवादों का समाधान न्याय, सम्मान एवं संवेदनशीलता के साथ हो और जहाँ बच्चों के कल्याण को सदैव सर्वोपरि रखा जाए।

कार्यक्रम में न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद, न्यायाधीश उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ तथा रणबीर सिंह मरहास, अतिरिक्त महाधिवक्ता, छत्तीसगढ़ राज्य, विषय विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित रहे। उनके विस्तृत अनुभव, गहन समझ एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण ने प्रतिभागियों को परिवार विवादों की बदलती जटिलताओं को बेहतर ढंग से समझने में अत्यंत लाभपहुंचाया।

कार्यक्रम में प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल एवं अन्य रजिस्ट्री अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव और अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम का स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा तथा धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त निदेशक द्वारा प्रस्तुत किया गया।

kamlesh Sharma

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